छत्तीसगढ़ के इस गांव में दिवाली सहित कई त्योहार मनाए जाते हैं एक सप्ताह पहले, ये है वजह

Naveen Kumar Mishra, Last updated: Sun, 31st Oct 2021, 3:32 PM IST
इन दिनों पूरे देश में दीपावली को लेकर उत्सव का माहौल बना हुआ है. लोग दिवाली की खुमार में रंगे हुए देखे जा रहे हैं. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि छत्तीसगढ़ में एक ऐसा गांव भी है जहां एक सप्ताह पहले ही दिवाली मना लिया गया है. वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार गांव वाले प्रत्येक त्योहार को एक सप्ताह पहले मनाते हैं.
एक ऐसा गांव जहां दीपावली और दूसरे त्योहार एक सप्ताह पहले मनाए जाते हैं

रायपुर: इन दिनों पूरे देश में दीपावली को लेकर उत्सव का माहौल बना हुआ है. कई जगह 2 नवंबर से 5 नवंबर तक दीपोत्सव मनाने की तैयारी चल रही है. लोग दीपावली की खुमार में रंगे हुए देखे जा रहे हैं. बाजारों में भीड़- भाड़ का माहौल है. कई लोगों ने शॉपिंग कर ली है और कई शॉपिंग कर रहे हैं. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि छत्तीसगढ़ का एक ऐसा गांव भी है जहां एक सप्ताह पहले ही दिवाली मना लिया गया है. छत्तीसगढ़ के समरासी गांव में शनिवार को धूमधाम से दिवाली का पावन त्योहार मनाया गया है.

 

गांव वाले रविवार को गोवर्धन पूजा मना रहे हैं

इन दिनों छत्तीसगढ़ में धमतरी जिले के समरा सी गांव की चर्चा पूरे प्रदेश और देश में हो रही है. गांव में चली आ रही वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार गांव वाले प्रत्येक त्योहार को एक सप्ताह पहले मनाते हैं. समरासी गांव की कुल आबादी 12 सौ है. यही वजह है कि शनिवार के दिन इस गांव में धूमधाम से लक्ष्मी पूजा की गई और उसके बाद पटाखे फोड़े गए. रविवार को गांव वाले गोवर्धन पूजा मना रहे हैं. वहीं गांव वाले ने बुधवार को गौरा गौरी को जगा कर और पूजा अर्चना करके दीपोत्सव की शुरुआत की थी.

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सालों से चली आ रही है परंपरा

गांव के गिरधर लाल दीवांगण बताते हैं कि गांव में सालों से सप्ताह भर पहले पर्व त्योहार मनाने की परंपरा चली आ रही है. उन्होंने बताया कि दीपावली, होली, दशहरा तथा अन्य सभी पर्व मुख्य तिथि से सप्ताह भर पहले ही मनाए गए हैं. परंपरा के बारे में गांव के ही गजेंद्र सिंह बताते हैं कि यहां प्रत्येक पर्व त्योहार में सबसे पहले सिरदार देव की पूजा की जाती है, उसके बाद ही पर्व त्योहार मनाया जाता है.

वर्षों पहले आए थे सिरदार

गांव के नेमीचंद सिन्हा ने बताया है कि वर्षों पहले सिरदार देव नाम से एक व्यक्ति गांव में आए थे. उन्होंने ही गांव वाले को प्रत्येक पर्व त्योहार एक सप्ताह पहले मनाने को कहा था, तभी से यह परंपरा चली आ रही है. गांव वाले इन्हीं सिरदार देव को अपना ग्राम देवता मानकर पूजा करते हैं.

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