सड़क के अभाव में नहीं पहुंची एम्बुलेंस, गर्भवती महिला को खाट पर ढोकर ले गए लोग

Smart News Team, Last updated: Tue, 4th Jan 2022, 1:58 PM IST
  • झारखंड के हजारीबाग के पुरनपनियां गांव के ग्रामीण आदिवासी समुदाय के लोग प्रसव पीड़ा से कराहती तथा गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को खाट पर उठाए परिजन एंबुलेंस तक पहुंचाने के लिए दो किलोमीटर तक पैदल चलने को विवश है. यहां पंचायत मुख्यालय का स्वास्थ्य उपकेंद्र कभी खुलता नहीं है. जिसके चलते यहां के ग्रामीणों को सामुदायिक अस्पताल इचाक के सदर अस्पताल हजारीबाग का रुख करना लाचारी है.
सड़क के अभाव में नहीं पहुंची एम्बुलेंस, गर्भवती महिला को खाट पर ढोकर ले गए लोग

रांची. देश की आजादी के सात दशक बाद भी हमारी स्वास्थ्य सेवाएं आज भी अव्यवस्था की चारपाई पर बीमार पड़ी है. सड़क निर्माण की कई महत्वकांक्षी परियोजनाओं के बाद भी अब भी देश के हजारों ऐसे गांव हैं जो इससे जुड़ नहीं सके हैं. ऐसे में आदिवासी समुदायों के गांव के हिस्सेदारी सबसे अधिक है. वहीं झारखंड के दरिया घागर पंचायत के पुरमपनियां गांव के ग्रामीण आदिवासी समुदाय के लोग प्रसव पीड़ा से कराहती तथा गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को खाट पर उठाए परिजन एंबुलेंस तक पहुंचाने के लिए दो किलोमीटर तक पैदल चलने को विवश है. जानकारी के मुताबिक यहां पंचायत मुख्यालय का स्वास्थ्य उपकेंद्र कभी खुलता नहीं है. जिसके चलते यहां के ग्रामीणों को सामुदायिक अस्पताल इचाक के सदर अस्पताल हजारीबाग का रुख करना लाचारी है.

इसी क्रम में सोमवार को हजारीबाग जिला अंतर्गत डाडीघाघर पंचायत स्थित पुरनपनियां गांव के उमेश हांसदा की गर्भवती पत्नी गुड़िया देवी को प्रसव दर्द हुआ. पति समेत अन्य ग्रामीणों ने ममता वाहन या एम्बुलेंस को कई बार फोन किया, लेकिन काफी देर तक वाहन के नहीं आने दर्द बढ़ने पर ग्रामीणों ने गर्भवती का खाट पर लिटाकर दो किलोमीटर पहाड़ी पगडंडी के रास्ते फुफंदी गांव के जंगल तक पहुंचे. इस दौरान सहिया मुन्नी देवी भी मौजूद थी उसने ममता वाहन के लिए कॉल सेंटर, हजारीबाग एवं एंबुलेंस के लिए कई बार फोन किया. कॉल सेंटर से ममता वाहन भेजने की बात भी कही गयी, लेकिन वाहन नहीं आया.

 

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रास्ते में ही दिया बच्चे को जन्म

वाहन के इंतजार में परिजन जंगल मे करीब ढाई घंटे तक रुके रहे. इस बीच महिला प्रसव पीड़ा से कराहती रही, लेकिन ममता वाहन या एंबुलेंस नहीं पहुंचा. बाध्य होकर सहिया मुन्नी देवी ने शाम 5 बजे फुफंदी गांव के प्राइवेट वाहन के मालिक से संपर्क किया. इसी दौरान गर्भवती महिला को प्राइवेट वाहन से अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन बीच रास्ते में ही गर्भवती महिला ने एक बच्चे को जन्म दिया. इसके बाद जच्चा-बच्चा को उसी हालत में शाम साढ़े छह बजे इचाक के सामुदायिक अस्पताल लाया गया.

मूलभूत आवश्यकताओं से कोसों दूर हैं लोग

इस मामले को लेकर भाजपा नेता रमेश कुमार हेमरोम ने कहा कि सरकाघाट पुल पुलिया के निर्माण तथा उप केंद्र खोलने की मांग जिला से लेकर राज्य तक की है. पूर्णिया गांव के लोग आज भी मूलभूत आवश्यकताओं से कोसों दूर रहने को विवश है. यहां सुविधाओं के अभाव का दंश झेल रहे हैं.

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