बजट से झारखंड के लोगों को बड़ी उम्मीद, 86 साल पुराने प्रोजेक्ट पर लगेगी मुहर !

Somya Sri, Last updated: Sun, 30th Jan 2022, 12:14 PM IST
  • देश में बजट सेशन की शुरुआत 31 जनवरी से होने वाली है. हर साल की तरह इस साल भी झारखंड वासियों को उम्मीद है कि सरकार बरवाडीह-चिरमिरी रेल परियोजना पर मुहर लगाएगी. ये प्रोजेक्ट आज से करीब 86 साल पहले ब्रिटिश शासन में शुरू हुआ था. लेकिन आजतक पूरा नहीं हो सका.
बजट सेशन की शुरुआत 31 जनवरी से (फोटो साभार-लाइव हिंदुस्तान)

ओम प्रकाश पाठक, गढ़वा

सुधीर कुमार

रांची: राज्य में जब भी बजट सेशन की शुरुआत होती है तो लोगों को यह उम्मीद होती है कि सरकार बरवाडीह-चिरमिरी रेल प्रोजेक्ट को पूरा करेगी. लेकिन हर साल ये एक उम्मीद बनकर रह जाती है राज्य वासियों को इसका इंतजार इसलिए भी है क्योंकि इस रेल प्रोजेक्ट का काम पूरा होने के बाद कोलकाता से मुंबई की दूरी में करीब 400 किलोमीटर की कमी आती है.

बताया जाता है, " 1935-36 में ब्रिटिश सरकार ने इस प्रोजेक्ट पर मुहर लगाई थी. योजना को धरातल पर उतारने के लिए ब्रिटिश शासन ने 1940-41 से काम शुरू कराया. यह काम 1946 तक चला. उसके बाद 1947 में देश आजाद होने के बाद ब्रिटिश शासन के अंत के साथ ही इस रेल प्रोजेक्ट पर ग्रहण लग गया. उसके बाद से सरकारें आईं गईं पर इसपर काम नहीं हुआ. फिलवक्त ब्रिटिश शासन में ही प्रोजेक्ट के तहत बनाए गए अधूरे पुल, मकान के अवशेष गढ़वा जिले के भंडरिया प्रखंड क्षेत्र में आज भी विद्यमान हैं. अंग्रेज शासन में ही बरवाडीह से छत्तीसगढ़ के बलरामपुर के सरनाडीह तक अर्थवर्क का काम पूरा करा लिया गया था. रेलवे लाइन के रास्ते में पड़ने वाले चनान और कनहर नदी पर पुल निर्माण का काम शुरू किया गया. उसके लिए पिलर भी खड़ा कर दिए गए थे. उसके बाद आजादी से पहले जो काम बंद हुआ फिर से शुरू नहीं किया जा सका."

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वहीं पलामू से सांसद वीडी राम कहते हैं ," बरवाडीह-चिरमिरी लाइन को लेकर ज्वाइंट वेंचर कमेटी बनी थी. छत्तीसगढ़ में रमण सिंह सरकार रहती तो अबतक काम शुरू हो जाता. उनकी सरकार चली गई तो प्रोजेक्ट पर काम थम गया. इस प्रोजेक्ट को शुरू करने के लिए मुख्य रूप से फंड की समस्या है."

क्या है ये रेल प्रोजेक्ट?

जानकारी के मुताबिक कोलकाता से मुंबई तक की दूरी कम करने के लिए इस रेलपथ की खोज ब्रिटिश शासन में की गयी थी ताकि कम समय में कोलकाता को मुंबई से जोड़ा जा सके. बरवाडीह-चिरमिरी रेल प्रोजेक्ट में झारखंड के चिरमिरी और अंबिकापुर के बीच रेललाइन बिछ चुकी है. केवल बरवाडीह से अंबिकापुर तक करीब 165 किलोमीटर की रेललाइन बनानी है. जो ब्रिटिश शासन के बाद से ही अटका पड़ा है.

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