कोरोना काल के बीच रांची के चर्च में पूरा हुआ ऑनलाइन मिस्सा अनुष्ठान

Smart News Team, Last updated: 02/11/2020 05:45 PM IST
  • लोगों मे आपने मृत परिजन की याद में फूल और मोमबत्ती भी जलाकर भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी. यह सिलसिला पूरे दिन भर चलता रहा. पूर्व में भी विभिन्न धर्मों के लोगों ने इस तरह के कार्य किए हैं. ये सभी रांची शहर में ईसाई धर्म को मानने वाले 9 प्रतिशत के साथ शहर की जनसंख्या में एक अलग स्थान रखते हैं.
रांची की कैथोलिक चर्च  में मृत लोगों की याद में पर्व मनाया गया है.

रांची: कैथोलिक चर्च कलीसिया में सोमवार को मृत लोगों की याद में पर्व मनाया गया है. इस अवसर पर चर्च में आर्च बिशप फेलिक्स टोप्पो  ने ऑनलाइन मिस्सा अनुष्ठान किया. इस दौरान चर्च के फादर्स ने सिर झुकाकर प्रार्थना की. महामारी के चलते दो गज की दूरी और स्वच्छता का भी खासा ध्यान रखा गया. 

जहां लोगों मे आपने मृत परिजन की याद में फूल और मोमबत्ती भी जलाकर भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी. यह सिलसिला पूरे दिन भर चलता रहा. पूर्व में भी विभिन्न धर्मों के लोगों ने इस तरह के कार्य किए हैं. ये सभी रांची शहर में ईसाई धर्म को मानने वाले 9 प्रतिशत के साथ शहर की जनसंख्या में एक अलग स्थान रखते हैं. उनकी संख्या हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बाद दूसरे पायदान पर है. अन्य प्रदेशों की तरह इस राज्य में भी सरकार ने कोरोना को देखते हुए कड़े प्रबंध किए जिसका नजीता भी अच्छा रहा. 

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क्या है मिस्सा अनुष्ठान?

मिस्सा अनुष्ठान कराने के लिए ईसाई धर्म के संत कब्र पर पानी छिड़कते हैं. यह पर्व प्रति वर्ष 2 नवंबर को सभी गिरिजाघरों में लोग अपने पूर्वजों की याद में इस त्यौहार को मनाते हैं. 

साथ ही कब्र स्थल की साफ सफाई की जाती है तथा उन्हें रंग एवं रंगोली से सजाया जाता है. पर्व के दिन इन सजे हुए कब्रो के पास मिस्सा पूजा होती है और पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए विशेष प्रार्थना की जाती है. ईसाई धर्म की मान्यता के अनुसार मृत्यु के बाद व्यक्ति संत बन जाता है और वह स्वर्ग में निवास करता है.

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