CM ने ली पेयजल और स्वच्छता विभाग की बैठक, कहा- 54 लाख घरों तक कराएं जल उपलब्ध

Smart News Team, Last updated: 14/12/2020 09:26 PM IST
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार पेयजल और स्वच्छता विभाग की समीक्षा बैठक कर लोगों को घर-घर नल से जल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि समयबद्ध तरीके से इस कार्य को जल्द से जल्द पूरा किया जाए ताकि लोगों को नल से शुद्ध जल उपलब्ध हो सके.
झारखंड मंत्रालय में पेयजल और स्वच्छता विभाग के साथ बैठक करते मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन

रांची. सोमवार को मुख्यमंत्री ने पेयजल और स्वच्छता विभाग के कार्यों की समीक्षा बैठक की. इस दौरान उन्होंने राज्य में ग्रामीण जलापूर्ति योजना के तहत घर-घर नल से जल उपलब्ध कराने का काम तेजी से करने के निर्देश दिए. गौरतलब है कि इस योजना के तहत प्रदेश के 54 लाख से अधिक घरों को जोड़ने का लक्ष्य रखा है. ताकि ग्रामीणों को नल से शुद्ध जल उपलब्ध हो सके.

मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि समयबद्ध तरीके से इस योजना को पूरा नहीं किया गया तो कई परिवार इस योजना का लाभ लेने से वंचित रह जाएंगे इसलिए सीएम ने समयबद्धता और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देते हुए इस योजना के कार्य की गति को बढ़ाने पर जोर दिया.

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बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि लघु जलापूर्ति योजना के तहत पंचायत या टोला स्तर पर ग्रामीणों को सौर ऊर्जा पर आधारित बोरिंग के जरिए जल उपलब्ध कराया जा रहा है. उसके रख-रखाव के लिए ग्रामीणों को जागरूक करना जरूरी है. इसके रख-रखाव को लेकर किसी प्रकार की कोताही न हो. ग्रामीण क्षेत्र में बन रहे रिचार्ज पिट के आकार में वृद्धि करें. भूगर्भीय जल के संवर्धन पर भी ध्यान देना आवश्यक है.

साथ ही मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि साहेबगंज, दुमका सहित अन्य जगहों में रहने वाले आदिम जनजाति परिवार को उपलब्ध कराए जा रहे पेय जलापूर्ति योजना से संबंधित वीडियो को साझा करें. निर्माणाधीन 260 योजनाओं का कार्य भी जल्द पूरा करें. पेयजलापूर्ति योजना को पूर्ण करने में जितनी भी अन्तर-विभागीय मामले हैं उनके लिए मुख्य सचिव स्तर पर बैठक बुला कर समस्या का निवारण किया जाए.

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इस दौरान मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत निर्मित शौचालय का सर्वे कराएं.ये देखें कि लाभुक इसका उपयोग कर रहें हैं या नहीं. लोगों में व्यवहारगत परिवर्तन की आवश्यकता है. साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि सभी शौचालय में पानी की सुविधा अवश्य हो. उन्होंने सामुदायिक शौचालय के निर्माण पर भी जोर देने को कहा है. इसमें ग्रामीणों की सहमति और उनकी आवश्यकताओं का ध्यान रखा जाए. सामुदायिक शौचालय निर्माण के लिए बड़े, मंझोले और छोटे टोलों का चयन करें.इन शौचालयों का रख-रखाव मनरेगा के माध्यम से किया जा सकता है.

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