तमिलनाडु से वापस लाई गईं जबरन बंधवा मजदूरी कर रहीं झारखंड की 8 बेटियां

Smart News Team, Last updated: 10/06/2021 09:32 PM IST
  • सभी लड़कियों को कौशल विकास योजना के नाम पर बिना ट्रेनिंग हर महीने 15 हजार रुपए का वेतन देने के नाम पर यहां लाया गया था लेकिन उन सभी से सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक काम करवाने के बावजूद केवल पांच या छह हजार रुपए का वेतन ही दिया जाता था.
तमिलनाडु से झारखंड लौटीं आठ बेटियां

रांची। तमिलनाडु के कोयम्बटूर के अवनाशी में स्थित एक कपड़ा मिल में दिसंबर माह से काम रहीं आठ लड़कियों को धनबाद एलेप्पी स्पेशल ट्रेन से गुरुवार को रांची लाया गया. इन सभी लड़कियों को कौशल विकास योजना के नाम पर बिना ट्रेनिंग हर महीने 15 हजार रुपए का वेतन देने के नाम पर यहां लाया गया था लेकिन उन सभी से सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक काम करवाने के बावजूद केवल पांच या छह हजार रुपए का वेतन ही दिया जाता था.

कोरोना के बाद लॉकडाउन की स्थिति होने पर पूरे दो महीने से काम बंद हो जाने के कारण इन युवतियों ने झारखंड वापस लौटने की इच्छा जताई लेकिन एनी सोर्स नाम की एक कंपनी से जुड़ी महिला जिसका नाम हिमा था, उसने इन्हें वापस नहीं आने दिया. इस पर इन लड़कियों ने गुमला में रहने वाले अपने जानकार को फोन कर मामले के बारे में बताया. मामले की सूचना प्रवासी कंट्रोल रूम को देने के बाद में झारखंड से कंपनी को पत्र भेजा गया और सभी लड़कियों को वापस झारखंड भेजने का आदेश दिया गया.

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तमिलनाडु से झारखंड वापस आने वाली युवतियों में सिसई की रहने वाली 35 वर्षीय बंसती कुमारी जो हाउस कीपिंग का काम करती थी, गुमला निवासी 19 वर्षीय माला कुमारी, 20 वर्षीय सीता कुमारी, 18 वर्षीय सीता कुमारी, 20 वर्षीय मरियम विलुंग, 19 वर्षीय सीता कुमारी, बेड़ों निवासी 20 वर्षीय सिमरन उरांव, 18 वर्षीय रायडीह की संतोषी कुमारी शामिल हैं जो वहां सिलाई का काम करती थीं.

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इन महिलाओं को प्रवासियों को लेने आए वाहन से उनके गांव तक पहुंचाया गया. इन युवतियों को उनके घर ले जाने के लिए रांची स्टेशन कंट्रोल रूम की काउंसलर रंजनी तांबे आई थीं. उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि इन लड़कियों से सात जून से बातचीत हो रही थी. हमलोगों ने संबंधित कंपनी से कागजी प्रक्रिया की. इसके बाद उन्हें आने दिया गया.

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