कृषि कानून की काट के लिए हेमंत सरकार ला सकती है झारखंड के किसानों के लिए नया बिल

Smart News Team, Last updated: Wed, 9th Dec 2020, 11:12 PM IST
केंद्र सरकार द्वारा लाए किसान कानूनों पर बढ़ते विरोध को देखते हुए झारखंड सरकार सतर्क हो गई है. इसके तहत हेमंत सरकार नए कृषि कानून को लाने का विचार कर रही है. जिसमें पुरानी चीजों को वैसे ही चलने की बात कही जा रही है. 
(तस्वीर: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन)

रांची: झारखंड की हेमंत सरकार ने केंद्र सरकार द्वारा तीन कानूनों में बदलाव करने का फैसला किया है. जिसके लिए सरकार अब नए राज्य कृषि बिल लाने पर विचार कर रही है. जिसके जरिए अब कोई कंपनी, व्यक्ति या उद्योगपति किसान को एमएसपी से कम पर फसल बेचने के लिए कहेगा तो उसपर कार्रवाई होगी. अगर कोई ऐसा करता है तो उसे तीन साल के लिए जेल जाना होगा. आपको बता दें कि बीते मंगलवार को किसानों ने इन कानूनों के खिलाफ भारत बंद बुलाया हुआ था. वहीं, पिछले 13 दिनों से देशभर के किसान सिंघु बॉर्डर पर इन कानूनों में बदलाव कराने के लिए केंद्र सरकार से मोर्चा लेते हुए डटे हैं.

सरकार की ओर से कहा गया है कि ये सभी राज्य कृषि कानून पंजाब, हरियाणा और छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा बनाए गए लॉ की तर्ज पर होंगे. इसे लेकर पिछले दिनों कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने खुद सीएम को अपने विचार उन्हें सुझाए थे. जिसमें उन्होंने कृषि उपज बाजार समितियों के बरकार रहने और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गारंटी देने की बात रखी थी. जिसके उल्लंघन पर उन्होंने सजा का भी प्रावधान रखने की बात सीएम से कही. वहीं, अब सरकार सभी विभागों की समीक्षा करने के बाद ही गठबंधन के सरकार में अन्य दलों के साथ इस बिल को लेकर बैठक करेगी. 

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सीएम हेमंत सोरेन ने नए राज्य कृषि कानून की बात को रेखांकित करते हुए कहा कि यह केंद्र सरकार द्वारा थोपे गए कानून की काट है. उन्होंने आगे यह भी कहा कि केंद्र द्वारा कृषि कानून एकतरफा निर्णय की उपज हैं. इसके लिए उन्हें राज्य सरकारों से इसपर सलाह लेनी चाहिए थी. मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि झारखंड सीमांत और भूमिहीन किसानों का प्रदेश है. तो ऐसे में किसी भी बड़े उद्योगपति या व्यापारी को उनका(किसानों) हक मारने नहीं दिया जाएगा. जिसमें किसानों को अपनी उपज दूसरे राज्यों में भेजने की बात को शामिल किया जाएगा.

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वहीं, सरकार में मंत्री पत्रलेख ने कहा कि ये तीन कृषि कानून विवाद और भ्रष्टाचार को जन्म देंगे. इसके साथ ही उन्होंने राज्य के नए कृषि कानून पर तभी मोहर लगेगी जब राज्यपाल से इसकी अनुमति मिल जाएगी. लेकिन, यह अभी विचाराधीन है.

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