झारखंड सरकार ने किया 8वीं के सिलेबस में बदलाव, विज्ञान 50% गणित 25% में कटौती

Smart News Team, Last updated: 04/12/2020 08:00 AM IST
  • स्कूलों में पढ़ने वाले पहली से आठवीं तक छात्र-छात्राओं के सिलेबस में भी कटौती कर दी गई है. सत्र 2020-21 में आठवीं के सिलेबस में गणित में 25 फीसदी से भी कम सिलेबस में कटौती की गई है. इसके अलावे विज्ञान, हिंदी और संस्कृत में 50 फीसदी से अधिक सिलेबस छोटा किया गया है.
झारखंड सरकार ने आठवीं कक्षा तक पढ़ने वाले बच्चों के पाठ्यक्रम में बदलाव किया गया है.(फाइल फोटो)

रांची. झारखंड सरकार ने आठवीं कक्षा तक पढ़ने वाले बच्चों के पाठ्यक्रम में बदलाव किया गया है. स्कूलों में पढ़ने वाले पहली से आठवीं तक छात्र-छात्राओं के सिलेबस में भी कटौती कर दी गई है. सत्र 2020-21 में आठवीं के सिलेबस में गणित में 25 फीसदी से भी कम सिलेबस में कटौती की गई है. इसके अलावे विज्ञान, हिंदी और संस्कृत में 50 फीसदी से अधिक सिलेबस छोटा किया गया है. पहली से आठवीं में पूरे चैप्टर को हटाकर पाठ्यक्रम संशोधित किया गया.  

हिंदी में डायन एकमात्र अंधविश्वास को अनिवार्य रूप से रखा गया है, जबकि झारखंड के दो सपूत चैप्टर को हटा दिया गया है. इसकी जानकारी छात्र-छात्राओं तक उपलब्ध कराई जा रही है. संशोधित पाठ्यक्रम के आधार पर ही परीक्षा में सवाल पूछे जाएंगे. पहली से आठवीं कक्षाओं के सिलेबस में सब चैप्टर नहीं बल्कि चैप्टर को हटाया गया है. हर क्लास और विषय में अलग-अलग संशोधन किए गए हैं. सातवीं के गणित में 22 में से सात चैप्टर ही घटाए गए हैं. छात्र-छात्राओं को दो तिहाई अध्याय पढ़ने होंगे.

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हिंदी में 18 में से नौ चैप्टर हटाए गए है. इस बड़े भाई साहब, अमरूद का पेड़, क्या निराश हुआ जाए, झारखंड के दो सपूत, बस की यात्रा, बूढ़ी पृथ्वी का दुख, गुरु शिष्य, पन्ना पन्ना बोलता है और तालाब बांधता धर्म सुभाव को पाठ्यक्रम से हटाया हटा गया है. संख्याओं के साथ खेलना, ठोस आकृतियों का चित्रण, द्विविमीय आकृतियों का क्षेत्रफल और आंकड़ों का प्रबंधन को इस बार हटाया गया है.द लैंड ऑफ स्टोरी बुक्स, चैंपियन वीमेन, व्हेन सचिन वाक आउट टू बैट, हेरिटेज ऑफ ट्री, बेबी एट ए माइक्रोचिप, टावर ऑफ स्ट्रेंथ यंग वॉइस ऑफ चेंज और ट्राई ट्राई अगेन को हटाया गया है. 

कोशिका, विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव, जंतुओं में जनन, फसल उत्पादन व प्रबंधन, आओ ब्रह्मांड को जाने, घर्षण एक अनिवार्य बल, संश्लेषित रेशे व प्लास्टिक, ध्वनि, प्राकृतिक परिघटनाएं और भूमिगत ईंधन इस बार छात्र-छात्राओं को नहीं पढ़ने होंगे. इतिहास में आधुनिक काल में भारत का इतिहास, ब्रिटिश काल में शिक्षा, राष्ट्रीय आंदोलन और झारखंड में हॉकी इस बार सिलेबस में शामिल नहीं हैं.नागरिक शास्त्र में संविधान, संसदीय शासन व्यवस्था, न्यायपालिका और सामाजिक न्याय को इस बार हटाया गया है.

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भूगोल में मृदा, जल, प्राकृतिक वनस्पति व वन्य जीव संसाधन और उद्योग इस बार सिलेबस में शामिल नहीं होंगे.संस्कृत में नधा: आत्मकथा निवारणीया इयं प्रथा, त्यागस्य फलं शुभम्, सदाचार:, संस्कृत भाषा: महत्वम्, झारखंड प्रांतस्य मडा, विनायक दामोदर सावरकर:, संकल्प सिद्धिदायक:, विमानयानं रचनामं: को इस बार सिलेबस से हटाया गया है.

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