झारखंड कैबिनेट में पारित हुआ सरना कोड, जनगणना 2021 से पहले केंद्र को भेजा जाएगा

Smart News Team, Last updated: Mon, 9th Nov 2020, 11:31 PM IST
  • झारखंड सरकार 11 नवंबर को सरना कोड के मामले पर चर्चा करने के लिए एक दिन के विशेष विधानसभा सत्र को भी मंजूरी दे दी.झारखंड सरकार चाहती है कि आदिवासियों को अलग से धर्म में वर्गीकृत कर ताकि जनसंख्या में उनको अलग से पहचान मिल सके.
.जनजातियों की अलग धार्मिक पहचान के लिए सरना कोड को मिली कैबिनेट से मंजूरी.(फाइल फोटो)

रांची. झारखंड राज्य 2021 की जनगणना में जनजातियों की धार्मिक पहचान को मान्यता देते हुए अलग आदिवासी या सरना संहिता के प्रावधान के लिए केंद्र सरकार से अनुरोध करेगा. इस प्रस्ताव को सोमवार को झारखंड राज्य मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है. झारखंड सरकार चाहती है कि आदिवासियों को अलग से धर्म में वर्गीकृत कर ताकि जनसंख्या में उनको अलग से पहचान मिल सके.

झारखंड सरकार 11 नवंबर को सरना कोड के मामले पर चर्चा करने के लिए एक दिन के विशेष विधानसभा सत्र को भी मंजूरी दे दी. झारखंड मुक्ति मोर्चा की अगुवाई वाली गठबंधन सरकार 2021 की जनगणना प्रक्रिया शुरू होने से पहले सदन प्रस्ताव को पास करवाना चाहती है ताकि बाद में इसे केंद्र सरकार को भेजा जा सके.

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मुख्यमंत्री हेमंत सरेन के मुख्य सचिव राजीव अरुण एक्का ने विवरण देते हुए कहा कि विभिन्न जनजातियां अपनी अलग धार्मिक प्रथाओं के विभिन्न सेटों का पालन करती हैं. लेकिन राष्ट्रीय जनगणना में उनकी अलग धार्मिक पहचान का उल्लेख नहीं है. उन्होंने कहा कि झारखंड के आदिवासियों के लिए एक अलग धार्मिक संहिता की मांग के लिए कैबिनेट ने हिंदू,  मुस्लिम,  ईसाई,  सिख, बौद्ध या जैन नहीं हैं.झारखंड में आदिवासियों को आदिवासी कहा जाता है जो प्रकृति की पूजा करते हैं और सरना उनका धर्म है इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा कि पूर्वोत्तर के खासी और जयंतिया सरनास नहीं हैं.

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