कैसे पढ़ेगा गरीब का बच्चा, रांची में RTE कानून की धज्जियां उड़ी, 100 में 89 का एडमिशन रिजेक्ट

Nawab Ali, Last updated: Thu, 23rd Sep 2021, 9:19 PM IST
  • देश में शिक्षा का अधिकार कानून लागू है जिसके तहत सरकारी और प्राइवेट स्कूल में गरीब बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के लिए 25 फीसदी सीट का प्रावधान है. लेकिन झारखंड की राजधानी रांची में आरटीई के तहत एडमिशन के लिए अप्लाई करने वाले 100 में 89 बच्चों को दाखिला नहीं दिया गया.
रांची में RTE के तहत गरीब बच्चों को नहीं मिल पा रहा एडमिशन. (फाइल फोटो)

रांची. देश में शिक्षा का अधिकार कानून होने के बाद भी रांची में गरीब बच्चों को सरकारी व प्राइवेट स्कूलों में दाखिला नहीं मिल पा रहा है. रांची में आरटीई कानून की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही है. एसोसिएशन फॉर परिवर्तन ऑफ नेशन ने साल 2018-19 शिक्षा का अधिकार की एक रिपोर्ट जारी की है. रिपोर्ट में साल 2018-19 में शिक्षा का अधिकार के तहत 74 प्रतिशत सीटें खाली रही हैं. रांची में मात्र 181 बच्चों को ही शिक्षा के अधिकार के तहत स्कूलों में एडमिशन मिल पाया है. शिक्षा का अधिकार के तहत स्कूलों में किये गए आवेदनों में से 89 प्रतिशत आवेदनों को रिजेक्ट कर दिया गया है.

झारखंड की राजधानी रांची में शिक्षा का अधिकार के तहत गरीब बच्चों को मिलने वाले एडमिशन को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. रांची में साल 2018-19 में मात्र 181 बच्चों को ही राइट टू एजुकेशन के तहत स्कूलों में दाखिला मिला है. हैरान करने वाली बात तो यह है कि शिक्षा का अधिकार के तहत किये गए आवेदनों में से 89 प्रतिशत आवेदन सरकारी और गैर सरकारी स्कूलों में रिजेक्ट किए गए हैं. जिसके कारण राजधानी में 74 प्रतिशत सीटें खाली रही हैं. एसोसिएशन फॉर परिवर्तन ऑफ नेशन द्वारा जारी की गई इस रिपोर्ट में से सिस्टम पर सवाल खड़ा होना लाजमी है. शिक्षा के अधिकार के तहत सरकारी और गैरसरकारी स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें गरीब बच्चों के लिए आरक्षित रहती हैं.

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सिर्फ राजधानी रांची में ही साल 2018-19 में 74 प्रतिशत शिक्षा के अधिकार के तहत अरक्षित सीटें खाली रही हैं. अक्सर शिक्षा का अधिकार के तहत मिलने वाले दाखिलों में कई बार आनाकानी करने की शिकायतें भी आती रहती हैं. बता दें कि शिक्षा के अधिकार के तहत गरीब बच्चों को मुफ्त में शिक्षा दी जाती है. इसके लिए गरीब बच्चो के मां-बाप को कोई भी फीस नहीं देनी होती है. शिक्षा का अधिकार कानून के तहत 6 से 14 साल वर्ष तक के बच्चों को मुफ्त शिक्षा देना अनिवार्य है.

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