बंदरों और लंगूरों की फूड हैबिट में हुआ बदलाव, लगी चटपटा चिप्स खाने की आदत

Sumit Rajak, Last updated: Sat, 20th Nov 2021, 10:38 AM IST
  • पलामू और लातेहार के जंगलों में करीब 200 से अधिक बंदर और लंगूर फूड हैबिट में आये बदलाव के कारण खतरे में हैं.पलामू टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर कुमार आशुतोष ने कहा कि पलामू टाइगर रिजर्व के अंदर जानवरों को तेल और मसालेदार चिप्स-स्नैक्स के खिलाने पर प्रतिबंध लगाया गया है. फूड हैबिट में आये बदलाव से जानवर आक्रामक हो गये हैं. लंगूर और बंदर खाने की लालसा में सड़क किनारे बैठे रहते हैं. ऐसे में जानवर वाहन की चपेट में आने का खतरा हमेशा बना रहता है.
फाइल फोटो

रांची.पलामू और लातेहार के जंगलों में करीब 200 से अधिक बंदर और लंगूर फूड हैबिट में आये बदलाव के कारण खतरे में हैं. फूड हैबिट में आये बदलाव के कारण जानवर काफी आक्रामक हो गये हैं. बता दें कि सैलानियों और राहगीरों द्वारा जानवरों को खुद के मनोरंजन के लिए तेल और मसालेदार चिप्स-स्नैक्स खाने के लिए दिए जाते हैं. इस भोजन से जानवरों के स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव पड़ रहा है. वन विभाग के जागरूकता अभियान के द्वारा जगह-जगह पर इससे संबंधित बोर्ड लगाये गये हैं. इसमें साफ- साफ लोगों से कहा गया  कि वे जानवरों को अपना भोजन ना दें, उन्हें वन्य ही रहने दें. जबकि भी लोग खुद के मनोरंजन के लिए जानवरों के प्राकृतिक खान-पान को  बदलाव करके प्रभावित कर रहे हैं.

पलामू टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर कुमार आशुतोष ने कहा कि पलामू टाइगर रिजर्व के अंदर जानवरों को तेल और मसालेदार चिप्स-स्नैक्स के खिलाने पर प्रतिबंध लगाया गया है.  लोगों की जागरूकता के लिए जगह-जगह पर बोर्ड भी लगाए गए हैं. उन्होंने कहा कि इस तरह का खाना खिलाने से जानवरों को स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है. लंगूर और बंदर खाने की लालसा में सड़क किनारे घंटों बैठे रहते हैं. ऐसे में जानवर वाहन की चपेट में आने का खतरा हमेशा बना रहता है.

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पलामू टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर मुकेश कुमार ने बताया कि इस तरह के अप्राकृतिक भोजन से जानवरों के बाल उड़ने लगते हैं. साथ ही गंभीर बीमारियां भी फैलती हैं. जानवरों में मनुष्यों के द्वारा वायरस जनित रोग फैल सकते हैं. 

टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर कुमार आशीष ने बताया कि पिछले पांच से छह सालों में बेतला नेशनल पार्क के बंदरों का व्यवहार में बदलाव आया है. लोगों के द्वारा लगाई गई खाने के कारण बंदर अब छीना झपटी भी करने लगे हैं. कोविड लॉकडाउन के दौरान बेतला में पर्यटन नही थे  तो यहां के बंदर और लंगूर बाहरी भोजन के लिए बेचैन से दिखे. इससे बंदरो और लंगूरो को आक्रामक बनने पर मजबूर कर दिया. लॉकडाउन के दौरान बेतला के बंदर और लंगूरों ने कई  बार खाने को लेकर लोगों पर हमला किया. कई बार तो वन अधिकारियों पर भी जानवरों के द्वारा  हमले हो चुके हैं.

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