झारखंड सरकार पारा शिक्षकों पर सख्त, नो वर्क-नो पे का फॉर्मूला किया लागू

Smart News Team, Last updated: Fri, 6th Aug 2021, 11:24 AM IST
  • पारा शिक्षकों के धरना-प्रदर्शन को लेकर राज्य सरकार ने सख्ती अपनाते हुए नो वर्क-नो पे का फॉर्मूला लागू किया है. इसके साथ ही राज्य परियोजना निदेशक ने धरना-प्रदर्शन, घेराव आदि के लिए स्कूलों से पारा शिक्षकों की गैरमौजूदगी को गलत भी बताया है.
झारखंड सरकार ने पारा शिक्षकों पर नो वर्क नो पे का फॉर्मूला किया लागू

रांची. पारा शिक्षकों के आंदोलन पर झारखंड सरकार ने सख्त मिजाज अपनाते हुए नो वर्क-नो पे का फॉर्मूला लागू कर दिया है. शिक्षक स्कूल में बच्चों की शिक्षा को छोड़कर धरना-प्रदर्शन में शामिल हो रहे है. जिससे बच्चों की पढ़ाई में नुकसान हो रहा है. इसे देखते हुए सरकार ने शिक्षकों पर यह फॉर्मूला लागू किया है. इसके साथ ही पारा शिक्षकों पर अनुशासनिक कार्रवाई का भी आदेश दिया गया है. हालांकि सरकार के इस आदेश का पूरे प्रदेश के पारा शिक्षकों ने विरोध किया है.

बता दें कि पारा शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर बीते दिनों में 15 से 19 मार्च की अवधि में विधानसभा घेराव की घोषणा की थी. झारखंड सरकार अभी तक जहां पारा शिक्षकों के लिए स्थायीकरण से लेकर कल्याण कोष एवं वेतनमान देने की दिशा में अपने कदम आगे बढ़ा रही थी. वहीं अब झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने बच्चों की शिक्षा को देखते हुए पारा शिक्षको को के इस घेराव को अनुचित बताया है. इसके साथ ही सभी जिला अधीक्षकों को इस अवधि में स्कूलों में पारा शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने का भी आदेश दिया है.

राज्य परियोजना निदेशक ने इस संबंध में यह आदेश दिया है कि कि घेराव, धरना-प्रदर्शन आदि के लिए स्कूलों से पारा शिक्षकों की अनुपस्थिति को अनधिकृत माना जाएगा. स्कूल से अनुपस्थित होने वाले ऐसे पारा शिक्षकों पर नो वर्क नो पे का नियम लागू होगा. निदेशक के अनुसार इस अवधि में बहुत विशेष परिस्थिति में ही गंभीर बीमारी व अस्वस्थता के आधार पर पारा शिक्षकों को अवकाश दिया जाएगा.

सरकार के इस आदेश पर एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा का कहना है कि यह एक तुगलकी फरमान है. वहीं मोर्चा के पदाधिकारियों का कहना है कि जिलावार शेड्यूल के अनुसार पारा शिक्षक बिना डरे विधानसभा के घेराव कार्यक्रम में शामिल होंगे. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जब तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक वो आंदोलन करते रहेंगे. यह घेराव कार्यक्रम प्रमंडल के अनुसार अलग-अलग दिनों में होगा.

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