तैयारीः सोलर एनर्जी और एलपीजी के इस्तेमाल से खर्च बचाएगा एचईसी, बंद होगा कोयला का प्रयोग

Sumit Rajak, Last updated: Tue, 1st Feb 2022, 6:47 AM IST
  • आर्थिक संकट से गुजर रहे एचईसी कुछ नए बदलाव कर अपना खर्च कम रहा है. इसके लिए योजना तैयार की गयी है. इसके तहत एचईसी ने ऊर्जा क्षेत्र में होने वाले खर्च में कटौती कर बड़ी राशि बचाने की योजना तैयार कर काम भी शुरू कर दिया है. प्लांटों में कोयला का इस्तेमाल धीरे- धीरे बंद करने और सौर ऊर्जा से प्लांटों को चला कर खर्च बचाया जाएगा.
फाइल फोटो

रांची.आर्थिक संकट से गुजर रहे एचईसी कुछ नए बदलाव कर अपना खर्च कम रहा है. इसके लिए योजना तैयार की गयी है. इसके तहत एचईसी ने ऊर्जा क्षेत्र में होने वाले खर्च में कटौती कर बड़ी राशि बचाने की योजना तैयार कर काम भी शुरू कर दिया है. प्लांटों में कोयला का प्रयोग धीरे- धीरे बंद करने और सौर ऊर्जा से प्लांटों को चला कर खर्च बचाया जाएगा. एचईसी कॉलोनी में कई स्थानों पर सोलर पावर प्लांट लगाने की भी योजना है. इस प्रयोग से ऊर्जा के क्षेत्र में हो रहे खर्च में 25-30 फीसदी कमी आएगी. इसी कड़ी में कंपनी ने कोयले से चलने वाले चार फर्नेंस को एलपीजी से चलाने का निर्णय लिया है. 

कंपनी के अधिकारी ने कहा कि इससे कंपनी में कोयले की खपत को कम करने में भी मदद मिलेगी. एलपीजी ग्रीन इंधन है, इससे प्रदूषण को भी नियंत्रित करने में मदद मिलेगी.बता दें कि कंपनी ने जिन फर्नेस को गैस से चलाने का निर्णय लिया है, उसमें प्रोड्यूसर गैस से चलने वाले फर्नेस को एलपीजी से चलाने का निर्णय महत्वपूर्ण है. अब तक चार हिटिंग फर्नेस को एलपीजी में परिवर्तित किया गया है. 

अधिकारियों ने बताया कि एलपीजी की क्लोरिफिक वैल्यू कोयले की क्लोरिफिक वैल्यू से कई गुना अधिक है. ऐसे में कम इंधन में ज्यादा ताप उत्पन्न करने में मदद मिलेगी. इसके प्रयोग से हीट ट्रीटमेंट साइकिल को सुचारू रूप से निर्बाध गति से चलाया जा सकेगा. इसके साथ इससे अपशिष्ट पदार्थ भी कम निकलेंगे. एफएफपी की 44,000 टन कास्टिंग एवं फोर्जिंग्स की क्षमता है. बता दें कि मुख्यरूप से तीन प्रकार के फर्नेस है. इंडक्शन फर्नेस की क्षमता 0.5 टन, दो टन और तीन टन है. जबकि आर्क फर्नेस की क्षमता 5 टन, 10 टन, 20 टन और 60 टन की है. कंपनी के बड़े वैक्यूम और डिसगैसिंग फर्नेस की क्षमता 60 टन है. कंपनी में जल्द ही सारे फर्नेस को गैस संचालित करने पर कार्य किया जाएगा.

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प्लांट चलाने के लिए सोलर एनर्जी का प्रयोग

एचईसी अपने प्लांटों को चलाने के लिए सोलर एनर्जी का इस्तेमाल किया जाएगा. एचईसी परिसर में छह-छह मेगावाट क्षमता के प्लांट लगेंगे. इसके लगने से एचइसी अपनी ऊर्जा की जरूरत को पूरा करेगा. यह कार्य कई फेज में और आवासीय परिसर के कई जगहों पर भी किया जायेगा. पहला सोलर पावर प्लांट एचएमबीपी के पास लगेगा और इसके लिए जमीन चिन्हित कर ली गयी है. जहां-जहां सोलर पावर प्लांट लगेगा वहां एचईसी द्वारा हर्बल गार्डेन भी लगाया जायेगा. सोलर पावर प्लांट के लिए एचईसी और एनर्जी एफिशिएंसी सर्विस लिमिटेड (ईईएसएल) के बीच एमओयू भी हुआ है.

 

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