सरकारी योजनाओं से जुड़ कर आत्मनिर्भर बनने लगी महिलाएं, सुधार रही परिवार की आर्थिक

Sumit Rajak, Last updated: Thu, 3rd Feb 2022, 9:04 AM IST
  • झारखंड सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से जुड़कर झारखंड के ग्रामीण इलाकों की महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं. इन योजनाओं से जुड़कर उन्होंने न सिर्फ अपनी आर्थिक हालत सुधारी, बल्कि गांव के लोगों को भी सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया. मनरेगा और दीदी बाड़ी योजना से जुड़कर लोहरदगा और सिमडेगा के ग्रामीण इलाकों की महिलाओं ने अपनी जिंदगी बदली.
फाइल फोटो

रांची. झारखंड सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से जुड़कर झारखंड के ग्रामीण इलाकों की महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं. इन योजनाओं से जुड़कर उन्होंने न सिर्फ अपनी आर्थिक हालत सुधारी, बल्कि गांव के लोगों को भी सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया. इन योजनाओं के तहत राज्य सरकार ग्रामीण महिलाओं को मेट बनाने का भी कार्य कर रही है. मनरेगा और दीदी बाड़ी योजना से जुड़कर लोहरदगा और सिमडेगा के ग्रामीण इलाकों की महिलाओं ने अपनी जिंदगी बदली,

ये मेट गांव के लोगों को सरकारी योजनाओं की जानकारी, उन योजनाओं से जोडने की पहल, गांव में मनरेगा के तहत हो रहे कार्यों में संलग्न करते हुए उन्हें पारिश्रमिक का भुगतान समेत अन्य कार्य करतीं हैं, जिसके एवज में राज्य सरकार उन्हें राशि का भुगतान करती है. अब ये मेट अपने आर्थिक स्वावलंबन का मार्ग प्रशस्त करते हुए गांव के लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत बन गई हैं.मनरेगा योजना वर्तमान समय में ग्रामीणों के लिए वरदान बन गया है.

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मेट बनने के बाद सुधरी अवेदा की आर्थिक हालत

लोहरदगा की 8वीं पास अवेदा खातून 2019 में मेट बनी. उसने बताया कि मेट के रूप में उसका काम करने का अनुभव अच्छा रहा है. गरीब ग्रामीणों को कार्य देकर उन्हें समय पर भुगतान करा कर काफी अच्छा लगता है. अवेदा मेट के रूप में चयन होने से पहले खेती-मजदूरी करके किसी तरह अपने परिवार का भरण-पोषण करती थी. अब मेट बनने के बाद उसका परिवार आर्थिक रूप से अच्छा हो गया है.

मनरेगा आयुक्त राजेश्वरी बी ने बताया कि मनरेगा योजना ग्रामीण के लिए वरदान बन गया है. इस बदलाव के पथ प्रदर्शक बने हैं, मनरेगा के महिला मेट. यह मनरेगा योजना से जुड़कर जीवन को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है.

 

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