NLU फंड मामले में झारखंड हाईकोर्ट की नाराजगी, कहा ऐसा लगता है सरकार न्यायपालिका से चाहती सीधा टकराव

Shubham Bajpai, Last updated: Thu, 9th Sep 2021, 2:34 PM IST
  • नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी को फंड देने के मामले में सुनवाई के दौरान  हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की. कोर्ट ने कहा कि सरकार इस मामले में हठधर्मिता दिखा रही है, ऐसा लगता है कि वो यूनिवर्सिटी को फंड देना ही नहीं चाहती है. कोर्ट ने कहा कि सरकार यूनिवर्सिटी को फंड प्रदान करे.
NLU फंड मामले में हाईकोर्ट की नाराजगी

रांची. नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी को फंड देने के मामले में आज झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान सरकार ने इस मामले को लेकर अपन पक्ष रखा. सरकार ने सुनवाई के दौरान यूनिवर्सिटी को अतिरिक्त फंड देने इंकार कर दिया और शपथ पत्र दाखिल कर कहा कि यूनिवर्सिटी स्वपोषित है और इसे अपना खर्च खुद वहन करना पड़ेगा. हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के शपथ पत्र पर नाराजगी व्यक्त की. कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार की हठधर्मिता से ऐसा लगता है कि वो यूनिवर्सिटी को फंड देना ही नहीं चाहती है. कोर्ट ने सरकार के शपथ पत्र को खारिज कर दोबारा शपथ पत्र दाखिल करने के निर्देश दिए. साथ ही कहा कि राज्य सरकार यूनिवर्सिटी को फंड प्रदान करे. अब इस मामले की अगली सुनवाई 2 हफ्ते बाद होगी.

राज्य सरकार को न्यायपालिका के आदेश की नहीं कोई परवाह

हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डॉ. रवि रंजन व जस्टिस एसएस प्रसाद की कोर्ट में चल रहे इस मामले में सरकार पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार के रवैये से लगता है कि उसे न्यायपालिका के आदेश की कोई परवाह नहीं है. ऐसा लग रहा है कि सरकार न्यायपालिका से सीधा टकराव लेना चाहती है. कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार ये ना भूले की हाई कोर्ट अदालत के मजेस्टिक को बरकरार रखने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है.

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अन्य राज्य की तरह झारखंड सरकार बी नियमित फंड दे

हाईकोर्ट ने कहा कि दूसरे राज्यों में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी को नियमित फंड दिया जाता है. इसके चलते झारखंड सरकार को भी यूनिवर्सिटी को नियमित फंड दिया जाना चाहिए.

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यूनिवर्सिटी खोलते वक्य तय हुआ था सरकार एक बार ही देगी 50 करोड़ का फंड

सरकार ने अपने शपथपत्र में बताया कि यूनिवर्सिटी खोलते वक्त ही तय हुआ था कि सरकार एक बार ही 50 करोड़ का फंड देगी. इसके बाद कोई आर्थिक मदद नहीं की जाएगी. 50 करोड़ देने के बाद 54 करोड़ रुपये और दिया गया. जिसके बाद कैबिनेट में निर्णय लिया गया कि अब यूनिवर्सिटी को अतिरिक्त राशि नहीं दी जाएगी.

 

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