पूर्व मंत्री योगेंद्र साव को झटका, झारखंड हाईकोर्ट ने किया जमानत रद्द

Smart News Team, Last updated: 03/12/2020 05:10 PM IST
  • योगेंद्र साव के खिलाफ बड़कागांव में एनटीपीसी के जमीनअधिग्रहण के विरोध में भीड़ को हिंसा के लिए उकसाने और सरकारी काम में बाधा पहुंचाने के आरोप में मामला दर्ज है और इस मामले में वह जेल में है.
पूर्व मंत्री योगेंद्र साव को झटका झारखंड हाईकोर्ट ने किया जमानत रद्द

रांची: राज्य के पूर्व मंत्री योगेंद्र साव को बड़ा झटका लगा है. झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस आर मुखोपाध्याय ने योगेंद्र साव को जमानत देने से इनकार करते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी है. योगेंद्र साव के खिलाफ बड़कागांव में एनटीपीसी के जमीन अधिग्रहण के विरोध में भीड़ को हिंसा के लिए उकसाने और सरकारी काम में बाधा पहुंचाने के आरोप में मामला दर्ज है और इस मामले में वह जेल में है. जमानत के लिए योगेंद्र साव ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी.

क्या है मामला

यह मामला एनटीपीसी की अधीनस्थ कंपनी त्रिवेणी सैनिक द्वारा चिरूडीह में कोयला उत्खनन से जुड़ा है. कोयला उत्खनन के विरोध में निर्मला देवी के नेतृत्व में कफन सत्याग्रह आंदोलन चलाया गया था. आंदोलन समाप्त कराने को लेकर प्रशासन और आंदोलनकारी के बीच विवाद हुआ था, जिसमें पुलिस फायरिंग में चार लोगों की मौत हो गई थी.

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अप्रैल में भी हुई थी एक अलग मामले में जमानत रद्द

बड़कागांव थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी परमानंद मेहरा ने एक वीडियो वायरल होने के आधार पर पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के खिलाफ कांड संख्या 167/2018 दर्ज कराया था. आरोप है कि उस वायरल वीडियो में योगेंद्र साव पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास पर जबरन केस में फंसाने और तत्कालीन थाना प्रभारी परमानंद मेहरा पर असामाजिक तत्वों से साठगांठ की बात कह रहे हैं. उसी वीडियो में परमानंद मेहरा की संपत्ति की एनआइए से जांच की मांग भी की गई है. इसके अलावा, योगेंद्र साव पर बेटे के मामले में परमानंद पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का भी आरोप है.

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कोर्ट की पाबंदी के बावजूद झारखंड-दिल्ली की यात्रा की थी.

झारखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि पूर्व कृषि मंत्री योगेंद्र साव को निर्धारित तिथि तक भोपाल में रहना है, लेकिन वे झारखंड और दिल्ली की यात्रा करते रहे. राजनीतिक गतिविधियों में उन्हें शामिल नहीं होना था, लेकिन लोकसभा चुनाव का टिकट पाने के लिए दिल्ली में उनकी सक्रियता देखी गई. मनाही के बावजूद उन्होंने चिरूडीह केस से जुड़े लोगों से संपर्क किया. सरकार ने इन सभी शर्तों के उल्लंघन का ब्योरा देते हुए अर्जी दी थी.

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