झारखंड के महाधिवक्ता और अपर महाधिवक्ता पर हाईकोर्ट ने चलाया अवमानना का केस

MRITYUNJAY CHAUDHARY, Last updated: Wed, 1st Sep 2021, 7:19 PM IST
  • झारखंड के महाधिवक्ता राजीव रंजन और अपर महाधिवक्ता सचिन कुमार पर अदालत की अवमानना के लिए हाईकोर्ट ने आपराधिक मामला चलाने का आदेश दिया है. झारखंड में पहली बार किसी महाधिवक्ता या अपर महाधिवक्ता के ऊपर Contempt of Court का आपराधिक केस चलेगा.
झारखंड के महाधिवक्ता और अपर महाधिवक्ता पर हाईकोर्ट ने चलाया अवमानना का केस

रांची. झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के महाधिवक्ता राजीव रंजन और अपर महाधिवक्ता सचिन कुमार पर अदालत की अवमानना का आपराधिक केस चलाने का आदेश दिया है. बुधवार को कोर्ट ने मामले का स्वतः संज्ञान लेकर दोनों पर मुकदमा चलाने का आदेश देते हुए रजिस्ट्रार को राज्य सरकार के शीर्ष कानूनी अधिकारियों को नोटिस भेजने का निर्देश दिया है. 

हाईकोर्ट रूल के मुताबिक अवमानना केस को आगे की सुनवाई के लिए खंडपीठ में भेज दिया गया है. जस्टिस एसके द्विवेदी की अदालत ने मंगलवार को मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. झारखंड में यह पहला मामला है जब राज्य के महाधिवक्ता और अपर महाधिवक्ता के खिलाफ अवमानना का आपराधिक मामला चलाया जा रहा है.

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राज्य सरकार के टॉप लॉ अफसर महाधिवक्ता और अपर महाधिवक्ता पर अवमानना का यह केस साहिबगंज की थाना प्रभारी रूपा तिर्की की मौत की सीबीआई जांच को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता की एक टिप्पणी को लेकर हुआ है. जस्टिस द्विवेदी ने अपने आदेश में कहा कि 13 अगस्त को महाधिवक्ता और अपर महाधिवक्ता ने जो कहा उससे न्यायपालिका की गरिमा धूमिल हुई है. दोनों का बयान किसी एक जज के खिलाफ नहीं बल्कि कोर्ट के ऊपर था.

रूपा तिर्की के पिता देवानंद उरांव की हस्तक्षेप याचिका खारिज

जस्टिस द्विवेदी ने कहा कि दोनों को अपना पक्ष रखने और शपथ पत्र दाखिल करके आपत्तिजनक बात कहने के लिए माफी मांगने का समय दिया गया था लेकिन दोनों ने ना तो जवाब दिया और ना ही तारीख पर पेश हुए. सरकार का पक्ष रखने के लिए तीसरे वकील को भेजा गया. रूपा तिर्की के पिता देवानंद उरांव ने भी हस्तक्षेप याचिका दाखिल कर अवमानना का केस चलाने की अपील की थी जिसे कोर्ट ने तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया. देवानंद उरांव ने ही बेटी की मौत को हत्या बताते हुए सीबीआई जांच की मांग की है.

झारखंड के महाधिवक्ता पर क्यों चला अवमानना का केस

दरअसल, रूपा तिर्की मौत की सीबीआई जांच को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान एक तारीख पर महाधिवक्ता राजीव रंजन ने जस्टिस एसके द्विवेदी से कहा था कि उन्हें इस मामले की सुनवाई नहीं करनी चाहिए. महाधिवक्ता ने कोर्ट से कहा था कि 11 अगस्त को सुनवाई के बाद देवानंद उरांव के वकील का माइक्रोफोन ऑन रह गया था जिसमें वो अपने मुवक्किल यानी उरांव से कह रहे थे कि इस मामले का फैसला उनके पक्ष में आना तय है, मामले की सीबीआई जांच दो सौ प्रतिशत तय है. राजीव रंजन ने रूपा तिर्की के पिता के वकील की इस बात को उठाते हुए कोर्ट से आग्रह किया था कि जब याचिकाकर्ता के वकील इस तरह का दावा कर रहे हैं तो यह कोर्ट इस केस की सुनवाई ना करे.

कोर्ट ने महाधिवक्ता से कहा था कि वो जो कह रहे हैं, उसे शपथपत्र के जरिए कोर्ट के सामने रखें. लेकिन महाधिवक्ता ने एफिडेविट दाखिल करने से मना करते हुए कहा कि उनका मौखिक बयान ही काफी है. इसके बाद जस्टिस द्विवेदी ने महाधिवक्ता के बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले को चीफ जस्टिस के पास रेफर कर दिया. चीफ जस्टिस रवि रंजन ने मामले को सुनवाई के लिए जस्टिस द्विवेदी की अदालत में भेज दिया.

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