नियोजन नीति में हिंदी-संस्कृत की अनिवार्यता हटाने पर सरकार के खिलाफ BJP का विरोध

Smart News Team, Last updated: Tue, 10th Aug 2021, 10:22 AM IST
  • झारखंड में नियोजन नीति के तहत हिंदी और संस्कृत की अनिवार्यता हटाने और उर्दू को लिस्ट में रखने को लेकर सरकार के खिलाफ विरोध हो रहा है. बीजेपी समेत विपक्षी पार्टी इस फैसले पर हेमंत सोरेन सरकार के खिलाफ हैं. विपक्ष ने सोरेन सरकार के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी है. जहां कांग्रेस विधायक दीपिका पांडेय इस फैसले पर सवाल खड़े कर दिए हैं. वही, कुछ नेता इस बात को आदिवासियों और मूलवासियों के हित में लिया गया फैसला बता रहे हैं.
झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने नियोजन नीति में हिंदी और संस्कृत को अनिवार्य भाषा के रूप में हटा दिया है.

रांची. झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSCC) द्वारा आयोजित ग्रेड III और IV की सरकारी नौकरियों के लिए बैठने वाले उम्मीदवारों की अनिवार्य भाषाओं की सूची से हिंदी और संस्कृत हटाने के लिए फैसले के बाद अब राज्य मंत्रिमंडल ने झारखंड में एक विवाद को जन्म दे दिया है. राज्य सरकार द्वारा लिए गए इस फैसले को लेकर अब जमकर विरोध हो रहा है. बीजेपी और आजसू ने इसके विरोध में आंदोलन करने तक की चेतावनी दे डाली है. वो राज्य सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम को असमंजस की स्थिति तक करार दे रहे हैं. कांग्रेस विधायक दीपिका पांडेय ने तो अंगिका की अनदेखी पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. वही, मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने तो सीएम को पत्र लिखकर मगही, भोजपुरी और अंगिका आदि भाषाओं का विकल्प छात्रों को देने का आग्रह तक किया है.

रांची के वरिष्ठ बीजेपी के विधायक सीपी सिंह ने फैसले का विरोध करते हुए कहा है कि ऐसा करने से एक बड़ी आबादी अनदेखी हुई है. जिन 12 भाषाओं को चुना गया है उसके अंदर ज्यादा भाषाओं से गढ़वा और पलामू के लोग अनजान हैं. सरकार का फैसला ऐसे में पूरी तरह से गलत है. इन सबके अलावा कुछ झामुमो और प्रदेश कांग्रेस के नेताओं ने इस फैसले को ऐतिहासिक तक करार दिया है. उनका कहना है कि पहले वाली नियोजन नीति में कमी थी. आदिवासी समेत मूलवासी, दलितों और पिछड़े लोगों के लिए ये फायदेमंद है.

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आपकी जानकारी के लिए हम बता देते हैं कि गुरुवार के दिन राज्य कैबिनेट में नियोजन नीति को लगाया गया था. इसमें इस बात का भी फैसला लिया गया था कि झारखंड की तीसरी और चौथी वर्गीय नौकरियां उन्हीं लोगों को हासिल होगी जोकि झारखंड से मैट्रिक और इंटर पास होंगे. इसके अलावा भाषा को लेकर भी फैसला लिया गया था. इस पूरे मामले को लेकर प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे, लाल किशोरनाथ शाहदेव और डॉ. राजेश गुप्ता छोटू का कहना है कि 20 सालों में ऐसा पहली बार हुआ है जब आदिवासियों और मूलवासियों के फायदें को ध्यान में रखते हुए गठबंधन सरकार ने युवाओं को नौकरी उपलब्ध कराने को लेकर कोई ठोस कदम उठाया है.

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