झारखंड पंचायत चुनाव दोबारा लड़ने के लिए देना होगा कार्यकाल का लेखा-जोखा

Smart News Team, Last updated: Sun, 28th Feb 2021, 7:29 PM IST
  • झारखंड पंचायत चुनाव के संबंध में मुखिया, जिला परिषद अध्यक्ष और पंचायत समिति प्रमुख को अपने कार्यकाल का विस्तृत लेखा-जोखा देना होगा. जिसमें कहीं कोई गड़बड़ देखने को मिली तो इन्हें दोबारा चुनाव लड़ने का मौका नहीं मिलेगा. यह निर्देश ग्रामीण विकास के पंचायती राज विभाग ने दिया है.
झारखंड पंचायत चुनाव: दोबारा चुनाव लड़ने के लिए देना होगा कार्यकाल का लेखा-जोखा

रांची. रांची में झारखंड पंचायत चुनाव के संबंध में मुखिया को दोबारा चुनाव लड़ने के लिए अपने पूरे  कार्यकाल का विस्तृत लेखा-जोखा देना जरूरी होगा. जिसमें अगर कोई गड़बड़ी मिली तो उन्हें दोबारा चुनाव नहीं लड़ने दिया जाएगा. यह निर्देश ग्रामीण विकास के पंचायती राज विभाग ने दिया है. इस आदेश के अंतर्गत मुखिया के साथ जिला परिषद अध्यक्ष और पंचायत समिति प्रमुख भी शामिल है. वैसे तो यह आदेश 30 दिसंबर को दिया गया था, लेकिन इसकी चर्चा अब जोर-शोर से होनी शुरू हुई है. 

झारखंड में पंचायत चुनाव की प्रक्रिया तेजी से चल रही है और जल्दी ही इस पंचायत चुनाव को आयोजित भी किया जाएगा. हालांकि झारखंड में त्रिस्तरीय पंचायतों का कार्यकाल जनवरी में ही समाप्त हो चुका है. लेकिन कोविड-19 को देखते हुए इसका चुनाव कराना संभव नहीं हो पाया था. इस कारण कार्यकारी समिति के माध्यम से फौरी व्यवस्था पर गांव की सरकार चल रही है. 

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पंचायत चुनाव को लेकर ग्रामीण विकास विभाग के पंचायती राज विभाग ने चुनाव से जुड़े पुराने आदेश-निर्देश की समीक्षा के समय नया आदेश जारी किया है. इस आदेश के तहत अपना कार्यकाल पूरा कर चुके मुखिया, जिप अध्यक्ष और पंचायत समिति प्रमुख को दोबारा चुनाव लड़ने के लिए अपने कार्यकाल का पूरा लेखा-जोखा विस्तृत रूप से देना होगा. इस निर्देश का पालन न होने पर आने वाले चुनाव में प्रतिनिधियों का अनिवार्य शपथ पत्र को अपूर्ण माना जाएगा. इसके साथ ही पदाधिकारियों एवं उम्मीदवारों के खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है.

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इस निर्देश के संबंध में उपायुक्त को पत्र जारी कर दिया गया है. जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि संबंधित प्रतिनिधियों को अपने पूरे कार्यकाल के विकास का लेखा-जोखा, बकाया व अपने पास मौजूद सरकारी सामग्रियों को वापस करना अनिवार्य है. इसके लिए एक फॉर्मेट भी जारी किया गया है. जिसके तहत जिला परिषद से संबंधित अभिलेख को उपायुक्त को देना होगा. पंचायत समिति से संबंधित अभिलेख को जिला पंचायत राज पदाधिकारी को देना होगा. वहीं मुखिया से संबंधित अभिलेख प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) को देना होगा.

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