बाएं हाथ का मांस निकालकर डॉक्टरों ने बना दी नई जीभ, कैंसर पीड़ित को मिला नया जीवन

Ruchi Sharma, Last updated: Tue, 22nd Feb 2022, 9:33 AM IST
  • झारखंड के रिम्स में डॉक्टरों ने नई जीभ लगाकर मरीज को नया जीवन दिया. ऑपरेशन में ईएनटी विभाग के डॉ. जहीद एम खान और उनकी टीम के अलावा प्लास्टिक सर्जरी विभाग के एचओडी डॉ. वक्रांत रंजन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
झारखंड RIMS अस्पताल 

रांची. झारखंड के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स में डॉक्टरों ने बड़ी कामयाबी हासिल की है. यहां जीभ कैंसर से जूझ रहे एक युवक की जान बचाने के लिए डॉक्टरों ने नई जीभ लगाकर मरीज को नया जीवन दिया. ऑपरेशन में ईएनटी विभाग के डॉ. जहीद एम खान और उनकी टीम के अलावा प्लास्टिक सर्जरी विभाग के एचओडी डॉ. वक्रांत रंजन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

डॉ जाहिद ने बताया कि सरायकेला के रहने वाले 45 साल के सुनील कुमार पाड़या जीभ के कैंसर से पीड़ित थे, जिस कारण मरीज के गर्दन के दोनों तरफ गांठ भी पड़ गया था. कैंसर के कारण मरीज के जीभ को काटना था. इससे पहले प्लास्टिक सर्जरी के एचओडी डॉ विक्रांत ने हाथ से मांस काटकर जीभ बनाया.
 

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बाएं हाथ की कलाई के मांस से बनाई गई जीभ

डॉक्टरों ने बताया कि कैंसर वाले लगभग 75 प्रतिशत हिस्से को काटना पड़ा. नई जीभ प्लास्टिक सर्जरी विभाग की मदद से लगाई गई. इसके लिए मरीज के बाएं हाथ की कलाई के मांस से जीभ बनाई गई. इस प्रक्रिया को प्री-रेडियल पोर आर्म फ्लैप कहा जाता है. यह जीभ बिल्कुल असली जीभ जैसी होगी. इससे मरीज को खाने और बोलने में किसी तरह की कोई परेशानी नहीं होगी.

मुफ्त हुआ ऑपरेशन

खास बात यह रही कि यह ऑपरेशन बिल्कुल मुफ्त रहा. किसी भी तरह का भुगतान मरीज से नहीं करवाया गया. डॉ जाहिद ने बताया कि मरीज को इसके लिए किसी भी तरह का भुगतान नहीं करना पड़ा है. जबकि, बाहर के बड़े अस्पतालों में इस तरह के ऑपरेशन के लिए दस से बारह लाख रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं.

इस वजह से होता है जीभ का कैंसर

डॉ जाहिद मुस्तफा ने बताया कि इस तहर की परेशानी लगातार गुटखा और तंबाकू के सेवन के कारण होती है. इसके आलावा नुकीले दांत भी इस परेशानी का कारण बनते हैं. नुकीले दांत के कारण जीभ में अक्सर जख्म लगता रहता है, जो बाद में कैंसर में भी तब्दील हो जाता है.

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