रांची में होने वाले सड़क हादसों पर अब इस एप से रखी जाएगी नजर, IIT मद्रास से लेंगे सुझाव

Sumit Rajak, Last updated: Mon, 31st Jan 2022, 8:36 AM IST
  • रांची सहित पूरे राज्य में सड़क हादसे बढ़े हैं. हर साल इससे हजारों लोग अपनों को खो देते हैं. हादसों को कम करने के लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं. इसी कड़ी में अब एक और पहल हो रही है. अब रांची समेत देशभर में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं पर केंद्र की सीधी नजर रहेगी. इन दुर्घटनाओं के वास्तविक कारणों का विश्लेषण कर आवश्यक सुधार करने का भी प्रयास किया जाएगा.
फाइल फोटो

रांची. रांची सहित पूरे राज्य में सड़क हादसे बढ़े हैं. हर साल इससे हजारों लोग अपनों को खो देते हैं. हादसों को कम करने के लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं. इसी कड़ी में अब एक और पहल हो रही है. अब रांची समेत देशभर में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं पर केंद्र की सीधी नजर रहेगी. इन दुर्घटनाओं के वास्तविक कारणों का विश्लेषण कर आवश्यक सुधार करने का भी प्रयास किया जाएगा. दरअसल, दुर्घटनाओं पर नियंत्रण के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने राष्ट्रीय सूचना केंद्र (एनआईसी) और आईआईटी मद्रास के सहयोग से आईआरएडी (इंटीग्रेटेड रोड एक्सीडेंट डेटाबेस) मोबाइल ऐप और वेब एप्लिेशन तैयार किया है. रांची में एक जनवरी से यह शुरू हो गया है. झारखंड के अन्य जिलों में भी इस ऐप का इस्तेमाल शुरू कर डाटा अपलोड करने का काम जारी है.

आईआरएडी एप के जरिए यह पता चल सकेगा कि सड़क दुर्घटनाएं क्यों हो रही हैं. किस इलाके में सबसे अधिक दुर्घटनाएं हो रही हैं. जिले में कितने ब्लैक स्पॉट हैं. ऐसी तमाम जानकारी एप के जरिए डेटाबेस तैयार कर आईआईटी मद्रास तक पहुंचेगी. आईआईटी मद्रास के विशेषज्ञों द्वारा सड़क हादसों का विश्लेषण किया जाएगा. उनके सुझाव के आधार पर पीडब्ल्यूडी-परिवहन विभाग और अन्य संबंधित विभाग मिलकर सड़क का डिजाइन और दूसरी खामियों को दूर करेंगे.

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ऑन द स्पॉट होगी इंट्री:

आईआरएडी एप के माध्यम से दुर्घटना स्थल से ही ऑन स्पॉट इंट्री की जा सकेगी. मौके पर ही एक्सीडेंट का फोटो लेकर उससे जुड़े तथ्य, व्यक्तियों व वाहन आदि की जानकारी भरी जा सकती है. इससे संबंधित ट्रेनिंग रांची के लगभग 35 थाना-टीओपी के पदाधिकारियों को दी गई है. रांची में एनआईसी की ओर से जिला सूचना पदाधिकारी शिवचरण बनर्जी, जिला नोडल पदाधिकारी कपींदर उरांव (ट्रैफिक डीएसपी-2) और डिस्ट्रिक रोल आऊट (डीआरएम) मैनेजर अमरजीत उरांव हैं. डीआरएम के अनुसार पोर्टल में फील्ड अफसर जैसे ही डिटेल डालेंगे, वह थाना प्रभारी के लॉगिन में आ जाएगा. यहां से डीटीओ फिर एमवीआई के लॉगिन में जाएगा. एमवीआई फील्ड जांच कर लेंगे. वे जैसे ही अपनी रिपोर्ट अपलोड करेंगे, पुन: थाना प्रभारी के लॉगिन में चला जाएगा. सभी प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन रहेगी.

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