क्या है सरना कोड और सरना धर्म कोड, जानें पूरा मामला

Smart News Team, Last updated: Wed, 11th Nov 2020, 3:41 PM IST
  • झारखंड विधानसभा में आज सरना कोड का प्रस्ताव पारित कर दिया गया है. इसके साथ ही बीजेपी सरना धर्म कोड की मांग कर रही है.
क्या है सरना कोड और सरना धर्म कोड, जानें पूरा मामला

रांची: झारखंड विधानसभा में आज सरना कोड का प्रस्ताव सर्वसम्मति के बाद पारित कर दिया गया है. लेकिन इसका विरोध अभी भी जारी है. विपक्ष के साथ ही आदिवासी भी इसका विरोध कर रहे हैं. इसके विरोध का कारण समझने के लिए ये जरूरी है कि पहले हम ये समझ लें कि आखिर ये सरना कोड क्या है और क्यों सरना कोड का विरोध और सरना धर्म कोड की मांग की जा रही है?

जानकारी के मुताबिक झारखंड में करीब 62 लाख सरना आदिवासी हैं. हर 10 साल के अंतर में होने वाली जनगणना में पहले नियम था कि धर्म से जुड़े 6 कॉलम के अलावा अगर कोई और धर्म है तो आप उसे अलग लिख सकते हैं और अगर आदिवासी हैं तो ट्राइब लिखते थे. लेकिन बाद में खत्म कर दिया गया. अब आदिवासियों का कहना है कि इसे हटाने की वजह से आदिवासियों की गिनती अलग-अलग धर्मो में बंटती गई जिसके चलते उनके समुदाय को काफी नुकसान हुआ है.

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सरना कोड के बारे में जानकारी देते हुए हजारीबाग विश्वविद्यालय के एंथ्रोपोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. जी. एन. झा ने बताया कि झारखंड में जनगणना में सरना कोड लागू करने की मांग काफी समय से चली आ रही है. सरना एक धर्म है जो प्रकृतिवाद पर आधारित है और सरना धर्मावलंबी प्रकृति के उपासक होते हैं.

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इसके साथ ही उन्होंने बताया कि झारखंड में 32 जनजाति हैं जिनमें से आठ पीवीटीजी (परटिकुलरली वनरेबल ट्राइबल ग्रुप) हैं. यह सभी जनजाति हिंदू की ही कैटेगरी में आते हैं, लेकिन इनमें से जो ईसाई धर्म स्वीकार कर चुके हैं वे अपने धर्म के कोड में ईसाई लिखते हैं. इसके साथ ही  झारखंड के एक सामाजिक कार्यकर्ता ने बताया कि यह भी एक कारण है कि आदिवासी समुदाय अपनी धार्मिक पहचान को बनाए रखने के लिए सरना धर्म कोड की मांग कर रहे हैं. जिससे उनकी धर्मिक पहचान में कोई बदलाव नहीं होगा.

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