रांची: आदिवासियों ने सरना धर्म कोड किया पारित, आंदोलन स्तर पर करेंगे जागरूक

Smart News Team, Last updated: Wed, 4th Nov 2020, 4:42 PM IST
आदिवासी समाज अपनी पहचान को लुप्त होता देख सरना धर्म कोड को लाने की कोशिश कर रहा है. जिसके चलते उसने सरना धर्म कोड का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर दिया है. इस बात को देशभर में एक आंदोलन इस समाज को जागरुक करने की योजना भी बनाई जा रही है.

बुधवार को आदिवासी समाज के कई संगठनों ने सरना धर्म कोड लागू कराने को लेकर हेसल पिस्का मोड़, रांची में बैठक आयोजित की. जिसकी अध्यक्षता आदिवासी सेना अध्यक्ष शिवा कच्छप और संचालन संजय तिर्की ने किया.बैठक में इस बात पर सबकी सहमति बनी कि पुजारी सरना की पूजा करते हैं इसलिए सरना धर्म कोड उचित है. आदिवासी धर्म कोड मांग को खारिज कर दिया गया और सर्वसम्मति से सरना धर्म कोड का प्रस्ताव पारित किया.

शिवा ने आगे बताया कि सरना धर्म कोड की मांग और अंदोलन को व्यापक स्वरूप देने के लिए झारखंड सहित ओडिशा, बंगाल, छत्तीसगढ़, बिहार, मध्यप्रदेश तथा अन्य राज्यों का सघन दौरा किया जाएगा. इसके साथ अंदोलन को देश व्यापी स्वरूप देने की तैयारी भी चल रही है. आदिवासी सेना अध्यक्ष शिवा कच्छप ने कहा, आदिवासी को समाप्त करने की साजिश रची जा रही है. अखिर भारत के इतने अधिक आबादी को कैसे धर्म कोड से बाहर रखा जा सकता है.

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अध्यक्ष आगे कहते हैं कि धर्म कोड एक धार्मिक पहचान देता है लेकिन आदिवासियों की कोई धार्मिक पहचान नहीं है. देशभर में आदिवासियों की जनसंख्या 17 करोड़ है. इनके आस्तित्व का क्या होगा? राज्य सरकार विशेष सत्र बुलाने की तिथी की घोषणा करें तो उसका स्वागत है. आने वाली 7 नवम्बर को सभी समाजिक संगठनो के प्रतिनिधीयों के साथ शिक्षित नागरिकों और जनप्रतिनिधियों की सेमिनार का आयोजन होने वाला है.

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हरमू देशवली सरना स्थल, रांची में समाज के नेता संजय तिर्की ने कहा कि सरना धर्म कोड हमारे अस्तित्व पहचान का सवाल है. उन्होंने आगे कहा, इसे मिटने नहीं देंगे और इसे हर हाल में लेकर रहेंगे. इस बैठक में मुख्य रूप से सती तिर्की, अनिता गाडी, मंटू तिर्की, सुभाष गाडी, अनिल तिर्की, गुड्डू तिर्की, नंदू तिर्की, शंकर तिर्की, अन्नु मुंडा, बितो तिर्की, रीना उरांव, शोभा तिर्की, काली तिर्की सहित कई और लोग मौजूद थे.

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