झारखंड में बच्चों में फैल रहा किडनी का कैंसर , अस्पताल पहुंचे रहे बच्चों में 70 फीसदी ग्रस्त

Shubham Bajpai, Last updated: Thu, 16th Dec 2021, 9:49 AM IST
  • झारखंड में बच्चों में कैंसर विल्मस ट्यूमर की समस्या् हो गई है. इस बीमार को लेकर बड़ी संख्या में बच्चे अस्पताल पहुंच रहे हैं. अनुमान अनुसार, रिम्स के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग में रोजाना करीब 70 फीसदी मामले किडनी कैंसर के ही आ रहे हैं. मरीजों का अस्पताल में लगातार इलाज की व्यवस्था की जा रही है. 
झारखंड में बच्चों में फैल रहा किडनी का कैंसर , अस्पताल पहुंचे रहे बच्चों में 70 फीसदी ग्रस्त

रांची. झारखंड में बच्चों में कैंसर विल्यस ट्यूमर का खतरा तेजी से बढ़ रहा है. इससे करीब 12 महीरज महीनेमें रिम्स पहुंच रहे हैं. वहीं, रिम्मस में आने वाले मरीजों में इनकी संख्या करीब 70 फीसदी हो गई है. इस रोग में बच्चों को समय से रिम्मस में इलाज किया जा रहा है. इस रोग में बच्चे के पेट में में गोला नजर आता है. पेशाब के दौरान खुन तक आ जाता है. इस तरह के लक्षण के चलते डॉक्टर से तत्काल संपर्क कर इसकी जांच करवाए.

अल्ट्रासाउंड के जरिए पता चल जाती बीमारी डॉ. हीरेन ने बताया कि ये बीमारी बच्चों में 6 महीने से 4 साल के बीच होती है. इस बीमारी में बच्चों का अल्ट्रासाउंड कराकर इसकी पकड़ हो जातीह है. फिर सीटी और बायोप्सी के जरिए बीमारी की पकड़ हो जाती है.

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समय से ठीक हो इसलिए हो इलाज

डॉ. हीरेन ने बताया कि इस बीमारी के बच्चों में इस तरह के कैंसर का कारण जेनेटिक्स म्यूटेशन होता है. इसमें कैंसर से अलग कैरेक्टर होते हैं. किसी भी तरह का बच्चे में तकलीफ हो तो तत्काल इसका इलाज शुरू हो सके, ताकि बच्चा समय में ठीक हो सके.

तीन स्टेप में हो रहा इलाज

डॉ. हीरेन ने बताया कि इस बीमार का इलाज तीन स्टेप पर कराया जा रहा है. इसके अनुसार पहले कीमो, फिर सर्जरी और फिर कीमो करवाई जा रही है. अस्पताल में रेडियोथेरेपी के जरिए भी इसका फ्री इलाज किया जा रहा है. कीमो के लिए रिम्स में सभी मेडिसिन में सुविधा फ्री है. जानकारी अनुसार, निजी अस्पता लमें कीमो कराने में एक बार में 8 से 10 हजार लग जाते हैं लेकिन इसमें कोर्स पूरा होने के बाद ही परिणाम दिखने लगते हैं.

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पेट के साथ छाती और ब्रेन में भी खतरा

इस बीमारी से बच्चों को पेट के छाती, ब्रेन और हड्डी में भई खतरा बढ़ जाता है. जिससे सर्जरी मुश्किल हो जाती है. इसके साथ ही कुछ मामलों में सेक्रोगसिजियल टोटोना की शिकायत भी कई बच्चों में देखने को मिल रही है. इससे रीढ़ के अंतिम छोर में ट्यूमर बनता है.

 

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