रांची: 3 दिवसीय राष्ट्रीय जनजातीय साहित्य उत्सव अखाड़ा की शुरूआत

Smart News Team, Last updated: Fri, 6th Nov 2020, 4:37 PM IST
राज्य संग्रहालय में शुक्रवार को तीन दिवसीय राष्ट्रीय जनजातीय साहित्य उत्सव अखाड़ा की शुरूआत. उद्घाटन सत्र में झारखंड के साहित्यकार महादेव टोप्पो की कविता संग्रह लेशंस फ्रॉम फॉरेस्ट एंड माउंटेन के अंग्रेजी अनुवाद का लोकार्पण. अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग समाज कल्याण विभाग और टीआरआई के सहयोग से कार्यक्रम की शुरूआत
राष्ट्रीय जनजातीय साहित्य उत्सव अखाड़ा की शुरूआत

रांची- मोराबादी स्थित राज्य संग्रहालय में शुक्रवार को तीन दिवसीय राष्ट्रीय जनजातीय साहित्य उत्सव अखाड़ा की शुरूआत की गई. अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग समाज कल्याण विभाग और टीआरआई के सहयोग से इसकी शुरूआत की गई. उद्घाटन सत्र में झारखंड के साहित्यकार महादेव टोप्पो की कविता संग्रह लेशंस फ्रॉम फॉरेस्ट एंड माउंटेन के अंग्रेजी अनुवाद का लोकार्पण किया गया. महादेव टोप्पो ने अपनी कविता के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इसमें 44 कविताएं हैं.

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महादेव टोप्पो ने अपनी कविता के बारे में बताया कि यह कविता संग्रह जंगल और पहाड़ों को संरक्षित करने का संदेश देती है. जो विकास की अंधी दौड़ में गुम होते जा रहे हैं. इस कार्यक्रम में अगले वक्ता के रूप में डॉ संतोष कुमार सोनकर ने ऑनलाइन अपनी बात रखी. आपको बताते चलें कि डॉ संतोष कुमार सोनकर ने कविता संग्रह का अंग्रेजी में अनुवाद किया है. अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि आज का दौर विकास की अंधी दौड़ का है. लेकिन हमें सस्टेनेबल डेवलपमेंट की ओर जाना चाहिए. जिससे जल जंगल और पहाड़ जैसी चीजों का नुकसान न हो.

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कार्यक्रम में युवा साहित्यकार समीर भगत ने कहा कि विकास की इस दौड़ में हम दुर्घटना और बीमारियों के ज्यादा शिकार हो रहे हैं. इकोलॉजिकल बैलेंस खत्म हो रहा है. इसके संरक्षण की आवश्यकता है. डॉ मिथिलेश ने पुस्तक के बारे में अपने विचार रखते हुए कहा कि यह पुस्तक आदिवासी संघर्ष की कहानी बयां करती है. साथ ही पुस्तक आदिवासी और आदिवासियों को बचाने के लिए संघर्ष जारी रखने की बात भी कहता है. हमें इस पर मंथन करना चाहिए. इस कार्यक्रम का संचालन टीआरआई के निदेशक डॉ रणेंद्र ने किया.

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