झारखंड के युवा नौकरी के लिए नहीं जाएं बाहर, सोरेन सरकार लाएगी खास कानून

Shubham Bajpai, Last updated: Wed, 8th Sep 2021, 8:04 AM IST
  • झारखंड में सोरेन सरकार जल्द ही झारखंड स्थाीय उम्मीदवारों को लेकर तैयार प्रवर समिति की रिपोर्ट पेश होने के बाद इस विधेयक को कानून बना सकती है. जिसके बाद राज्य की निजी कंपनियों में 40 हजार रुपये की सैलरी तक की नौकरियों में 75 फीसदी कर्मचारी झारखंड के स्थानीय लोगों को ही रखना होगा. 
अब झारखंड में नौकरी के लिए युवाओं नहीं जाना होगा बाहर, सरकार लागू करने जा रही ये कानून

रांची. झारखंड सरकार युवाओं के रोजगार के लिए लगातार काम कर रही है. अब सरकार युवाओं को रोजगार के लिए बाहर न जाना पड़े, इसलिए जल्द ही प्रवर समिति की रिपोर्ट पर कानून बनाकर उसे लागू करने जा रही है. इस लागू होने के बाद राज्य में स्थित निजी कंपनियों में 40 हजार रुपये तक के वेतन वाली नौकरियों में 75 फीसदी पदों पर झारखंड के स्थानीय युवाओं को भर्ती किया जाएगा. इससे युवाओं को रोजगार के कई नए अवसर मिलेंगे. साथ ही जो कंपनियां इस नियम का पालन नहीं करेंगी उनके खिलाफ कार्रवाई का भी प्रावधान किया जा रहा है.

जल्द बन सकता है कानून

सोरेन सरकार में श्रम मंत्री सत्यानंद ने प्रवर समिति की रिपोर्ट को सदन में पेश किया. जिसे जल्द पास करवाकर कानून बनवा लिया जाएगा. इस कानून के दायरे में राज्य की सभी निजी कंपनियां आएंगी. वहीं, केंद्र और राज्य की कंपनियों को इसमें शामिल नहीं किया गया है. हालांकि जो कंपनियां इन संस्थानों में आउटसोर्स के माध्यम से कर्मचारी उपलब्ध कराती हैं उनको भी इसमें शामिल किया गया है.

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खुद को नियोजन के पोर्टल में रजिस्टर्ड कराना अनिवार्य

प्रवर समिति के नियमानुसार, जो भी लोग कंपनी लगने के वजह से विस्थापित हुए है उनको और उनके साथ जिले के अन्य लोगों को रोजगार देने को लेकर कंपनी को विशेष ध्यान देना होगा. इस कानून के दायरे में स्थानीय वो ही युवा आएंगे जिनका रजिस्ट्रेशन नियोजन के पोर्टल में होगा.

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कानून के पालन के लिए गठित होगी समिति

इस कानून के पालन के लिए एक सक्षम अधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तर पर जांच की समिति बनेगी. इसमें स्थानीय निकाय, नामित प्रतिनिधि, डीडीसी, श्रम अधीक्षक समेत कई अधिकारी होंगे. जो समिति की रिपोर्ट के आधार पर सक्षम अधिकारी के सामने आने वाले कंपनी के दावे को स्वीकार व खारिज करने से पहले उसकी जांच होगी. वहीं, किसी शिकायत के फैसले से संतुष्ट न होने पर 60 दिन बाद दोबारा अपील की जा सकती है. साथ ही जो कंपनी कानून का उल्लंघन करेगी उस पर 5 लाख तक जुर्माना लगाया जा सकता है.

 

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