कृषि में हो रहा है प्लास्टिक कल्चर का उपयोग, मौसम को अनुकूल बनाकर हो रही खेती

Smart News Team, Last updated: Fri, 21st Jan 2022, 2:34 PM IST
  • कृषि में प्लास्टिक कल्चर तकनीक को बढ़ावा दिया जा रहा है. कृषि में प्लास्टिक कल्चर एक ऐसी नई तकनीक है जिसका इस्तेमाल कर किसान झारखंड की जलवायु को अनुकूल कर गुणवत्तायुक्त सब्जियों की खेती कर सकते हैं. राज्य में इस तकनीक के शोध में बेहतर परिणाम मिले हैं.
कृषि में हो रहा है प्लास्टिक कल्चर तकनीक का उपयोग (तस्वीर-साभार सोशल मीडिया )

रांची. हमारे जीवन के हर क्षेत्र में प्लास्टिक का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है. वहीं कृषि भी प्लास्टिक से अछूती नहीं रह पाई है. वर्तमान में कृषि में अच्छी पैदावार लाने के लिए प्लास्टिक सामग्रियों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है. इसी क्रम में कृषि में प्लास्टिक कल्चर तकनीक को बढ़ावा दिया जा रहा है. कृषि में प्लास्टिक कल्चर एक ऐसी नई तकनीक है जिसका इस्तेमाल कर किसान मौसम के अनुकूल कर गुणवत्तायुक्त सब्जियों की खेती कर सकते हैं. राज्य में इस तकनीक के शोध में बेहतर परिणाम मिले हैं.

बिरसा कृषि विश्वविद्यालय की ओर से झारखंड की जलवायु और खेती की जरूरतों को देखते हुए प्लास्टिक लो टनल (गुफानुमा) खेती तकनीक को बढ़ावा दिया जा रहा है. इससे संबंधित जानकारी को यूट्यूब में भी अपलोड किया गया है. इसे यूट्यूब लिंक http://youtube.com/XCJrqvmFqrk और www.youtube.com/c/birsaagriculturaluniversity, पर देखा जा सकता है.

खेती में ग्रीन हाउस प्रभाव का लाभ मिलता है

बीएयू के एग्रीकल्चार इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्राध्यापक व परियोजना अन्वेषक, एआईसीआरपी- प्लास्टिक कल्चर एंड एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी परियोजना, डॉ प्रमोद रायसहायक प्राध्यापक कहते हैं कि इस लो टनल तकनीक के उपयोग से खेती में ग्रीन हाउस प्रभाव का लाभ मिलता है और बाहर की तुलना में गुफा के अंदर का तापमान अधिक होता है. टनल को प्लास्टिक फिल्म से बनाया जा सकता है. कम ऊंचाई वाले गुफा के प्लास्टिक आवरण को विभिन्न सामग्री- प्लास्टिक फिल्म, कीड़ा रहित जाली और शेडनेट आदि से निर्मित किया जाता है.

 

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सालोंभर मौसम रहता है अनूकूल

इसका उपयोग विषाणुरहित सब्जियों के पौधे या पत्तीदार सब्जियों को उगाने में किया जाता है. इस तकनीक से सालोंभर मौसम को अनुकूल करते हुए सब्जी फसल उगाई जा सकती है. जाड़े के दिनों में मिट्टी और हवा का तापमान रात को काफी कम हो जाता है. जिसकी वजह से सब्जियों के पौधों को उगाना काफी मुश्किल होता है. इस तकनीक से मिट्टी का तापमान, हवा का तापमान, प्रकाश की तीव्रता और हवा की आर्द्रता को नियंत्रित किया जा सकता है.

खेती में आज प्लास्टिक का उपयोग कई रूप में हो रहा है जैसे सिंचाई के उपकरणों में, पॉलीहाउस में पॉली टनेल, शेड, नेट हाउस में पलवार या मल्च के तौर पर कई रूपों में हो रहा.

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