झारखंड में मॉडल स्कूल बनाने की प्रक्रिया शुरू, पहले चरण में 27 स्कूलों का चयन

Smart News Team, Last updated: Sat, 13th Feb 2021, 4:34 PM IST
  • झारखंड में शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए मॉडल स्कूलों की प्रक्रिया में प्रथम चरण के लिए 27 स्कूलों का चयन हो चुका है. इसके अलावा बच्चों में पढ़ने की क्षमता को सुधारने के लिए भी 'आओ पढ़े, खूब पढ़े' अभियान शुरू करने की योजना है. इसके साथ ही शिक्षकों को भी आईआईएम जैसी संस्थाओं से प्रशिक्षण मिलेगा.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड में माॅडल स्कूल बनाने के निर्देश दिए हैं. प्रतीकात्मक तस्वीर

राँची. झारखंड में शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए मॉडल स्कूल बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य में शिक्षा के स्तर में सुधार लाने के लिए मॉडल स्कूल बनाने का निर्देश दिया था. मॉडल स्कूल बनाने की इस प्रक्रिया को तीन चरणों में बांटा गया है. जिसमें पहले चरण में 80 स्कूलों को मॉडल स्कूल बनाया जाएगा. इसके अलावा दूसरे चरण में 500 स्कूल आएंगे और तीसरे चरण में पंचायतों में मॉडल स्कूल बनाने की योजना है. 

इन मॉडल स्कूलों में पढ़ाने के लिए शिक्षकों को भी ट्रेनिंग दी जाएगी. इसके लिए आईआईएम, एक्सएलआरई, एनसीईआरटी, एनईआईपी जैसी संस्थाओ से इनके प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी. जिससे ये शिक्षक स्कूल का संचालन बेहतर तरीके से कर सकें. मॉडल स्कूल के पहले चरण के लिए 27 स्कूलों का चयन हो चुका है और इन स्कूलों के टेंडर की प्रक्रिया भी प्रारंभ हो चुकी है. इसके अलावा इस चरण के बचे हुए 53 स्कूलों के टेंडर के लिए शीघ्र ही आमंत्रण शुरू किया जाएगा. मॉडल स्कूल बनाने की पूरी प्रक्रिया का निरीक्षण राज्य के मुख्यमंत्री स्वयं कर रहे है. 

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मॉडल स्कूल में शामिल सभी स्कूलों को सीबीएसई से संबद्धता प्रदान की जाएगी. इन स्कूलों में 1000-1200 बच्चों को शिक्षा प्रदान करने की व्यवस्था की जाएगी. इसके लिए बच्चों का चयन मेरिट के आधार पर होगा. जिसके लिए इन बच्चों का टेस्ट लिया जाएगा. इन स्कूलों में प्राथमिक कक्षा से लेकर 12 वीं तक की पढ़ाई होगी.इसके अलावा मॉडल स्कूलों में बच्चों के पठन-पाठन की क्षमता में सुधार के लिए भी एक अभियान प्रारंभ करने की योजना है. इस अभियान का नाम 'आओ पढ़े, खूब पढ़े' है. जिसके तहत बच्चों को कहानियां, आलेख आदि की पुस्तकें पढ़ाने का अभ्यास करवाया जाएगा. 

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इसके साथ ही बच्चों की अंग्रेजी में सुधार लाने के लिए एनसीईआरटी व एनईआईपी जैसी संस्थाओं से मदद ली जाएगी. इसके अलावा गरीब, पिछड़े और किसान समुदाय के बच्चों को बेहतर शिक्षा प्रदान करने के लिए भी सरकार ने योजना बनायी है. इसके लिए पंचायत स्तर पर मॉडल स्कूलों को खोलने का प्रावधान किया जा रहा है.

 

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