रांची: बिरसा मुंडा जेल के कैदी नक्सली कृष्ण झा की मौत, RIMS से हुआ था फरार

Mithilesh Kumar Patel, Last updated: Fri, 21st Jan 2022, 11:42 PM IST
  • रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदी कृष्ण मोहन झा की मौत हो गई. वह लीवर संक्रमण (सिरोसिस) बीमारी से पीड़ित था. तबीयत खराब होने के बाद उसे जेल से अस्पताल ले जाया गया था. इलाज के दौरान गुरुवार को उसकी मौत हो गई.
प्रतीकात्मक

रांची. रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय जेल, होटवार में आजीवन कारावास की सजा काट रहे नक्सली कृष्ण मोहन झा उर्फ अभय जी उर्फ विकास जी उर्फ धनंजय उर्फ काली झा की मौत हो गई. वह लीवर संक्रमण (सिरोसिस) बीमारी से पीड़ित था. तबीयत खराब होने के बाद उसे जेल से अस्पताल ले जाया गया था. इलाज के दौरान गुरुवार को उसकी मौत हो गई. कारा प्रशासन की ओर से प्रक्रिया पूरी कर लेने के बाद शुक्रवार को शव उसके परिजनों को सौंप दिया गया. अंतिम संस्कार के लिए शव को बिहार के मुजफ्फरपुर ले जाया गया.

नक्सली कृष्ण मोहन झा मूल रूप से मुजफ्फरपुर के कुढ़नी थाना क्षेत्र के बथना परिया का निवासी था. हालांकि हजारीबाग जिले के चौपारण थाना क्षेत्र स्थित असवाल चौक और लातेहार के अंबा कोठी में भी उसका आवास था. बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार के जेलर यासीन खान ने बताया कि शव भेजने में जेल प्रशासन की ओर से सहयोग किया गया.

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जानकारी के मुताबिक बीएचयू से स्नातक की पढ़ाई कर रहे कृष्ण मोहन झा को उस दौरान एमसीसी यानी माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर के किसी नेता के साथ रहने का मौका मिला़ था. बाद में  कृष्ण झा अपना समाजिक जीवन छोड़कर हार्डकोर नक्सली बन गया. उसे कोयल शंख जोन का एरिया कमांडर बनाया गया था.  साल 2016 में पंडरा ओपी क्षेत्र के पंडरा से मार्बल कारोबारी राजू मंडल को अगवा कर हत्या करने के मामले में कृष्ण झा पकड़ाया था. उसे कारोबारी राजू की हत्या करने के मामले में आजीवन कारावास की सजा हुई थी. गुमला कारागार में सजा काटने के दौरान कृष्ण झा की तबीयत खराब हो गई थी, जिसके बाद उसे रांची केंद्रीय कारागर में ट्रांसफर किया गया था. यहां उसकी इलाज राजेन्द्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेंडिकल साइंस RIMS के डॉक्टरों की सलाह पर चल रही थी. बता दें कि कृष्ण मोहन झा के खिलाफ गुमला और लातेहार में कई नक्सली और आपराधिक मामले दर्ज थे. जो अभी तक विचाराधीन थे.

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पिछले साल 19 सितम्बर को भोर में तीन बजे सजायाफ्ता कृष्ण मोहन झा रिम्स से फरार हो गया था. उसका RIMS के डॉ सीबी शर्मा वार्ड में लीवर सिरोसिस का इलाज चल रहा था. एक ऐसा लीवर संक्रमण जो कैंसर के बाद सबसे गंभीर बीमारी है लीवर सिरोसिस जिसमें बड़े पैमाने पर लीवर सेल नष्ट हो जाती हैं और इसकी बनावट बिगड़ने लगती है. इलाज के दौरान उसकी मां अस्पताल में सेवा करती थी. भागने से एक दिन पहले शनिवार की शाम भाई से मुलाकात के लिए रिम्स पहुंचा था. उसने शाम में भाई की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों को मिठाई खिलाई थी. अस्पताल में उसे हथकड़ी नहीं लगाई गई थी. इसके कारण मौका देख वह रविवार को भोर में भाग गया था. उसे बाद में मुजफ्फरपुर से गिरफ्तार कर रांची लाया गया था. इस मामले में बरियातू थाना में प्राथमिकी दर्ज हुई थी.

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