जमीन हड़पने के मामले में 83 साल बाद अदालत से मिला इंसाफ, चौथी पीड़ी ने जीता केस

Nawab Ali, Last updated: Tue, 9th Nov 2021, 8:54 AM IST
  • रांची के मौजा चंदवे में जमीन पर कब्जे मामले में पीड़ित परिवार को 83 साल बाद इंसाफ मिला है. आयुक्त मदन कुलकर्णी की अदालत ने सुनवाई करते हुए पीड़ित पक्ष के हक में फैसला सुनाया है. मौजा चंदवे में 12 गैर आदिवासी लोगों ने फर्जी कागज बनाकर जमीन पर कब्जा कर लिया था. 
रांची आयुक्त की अदालत से 83 साल बाद जीता जमीन का केस. सांकेतिक फोटो

रांची. झारखंड की राजधानी रांची में एक परिवार को जमीन मामले में चौथी पीड़ी के बाद इंसाफ मिला है. आपको जानकर हैरानी जरुर होगी लेकिन हकीकत यही है. पिठोरिया के चंदवे मौजा के रहने वाले शीतल पाहन के वंशज को अदालत से 83 साल बाद इंसाफ मिला है. अब आप अंदाजा लगा सकते हैं की भारतीय न्याय प्रणाली की क्या दशा है. अदालत में जमीन वापसी का फैसला 83 साल बाद परपोता के पक्ष में आया है. 

भारतीय न्याय प्रणाली में पीड़ितों को देरी से इंसाफ मिलने के आरोप लगते रहे हैं. इसका उदाहरण रांची के पिठोरिया के चंदवे मौजा के एक मामले में देखने को मिला है. दक्षिणी छोटानगर प्रमंडल आयुक्त मदन नितिन कुलकर्णी ने की अदालत ने सुनवाई करते हुए आदिवासी रैयत को तत्काल दखल दिहानी कराने का आदेश दिया है. पिठोरिया के चंदवे मौजा गांव में गैर आदिवासी 12 लोगों ने साल 1938 में गलत कागज तैयार कर जमीन को हड़प लिया था. 

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शीतल पाहन के वंशज दशरथ पाहन व जगरनाथ पाहन ने हड़पी हुई जमीन को वापस लेने के लिए साल 2005 में एसीआर पदाधिकारी के यहां आवेदन किया था लेकिन यहां पर आरोपीयों के पक्ष में फैसला आने के बाद अपील एवं रिवीजन चलता रहा. जिसके बाद मामला उपयुक्त के न्यायलय में चला और जगरनाथ पाहन केस जीत गया. इस दौरान जगरनाथ पाहन की मौत हो गई लेकिन वादी पक्ष ने मामले की 2017 में रिवीजन दाखिल किया. आयुक्त की अदालत में सुनवाई के चार साल बाद अब फिर से जगरनाथ के हक में फैसला आया है.     

 

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