250 करोड़ खर्च कर हटाया जाएगा झिरी में फैला कचरे का पहाड़, इस मॉडल ने किया था यहां कैटवॉक

Deepakshi Sharma, Last updated: Sat, 11th Sep 2021, 11:52 AM IST
  • रांची के झिरी में मौजूद कचरे का पहाड़ अब बायो माइनिंग के जरिए हटाया जाने वाला है. इसके लिए 250 करोड़ रुपये खर्च होने वाले हैं. ये मामला उस वक्त चर्चा में आया जब इस मुद्दे की ओर सबका ध्यान दिलाने के लिए पूर्व मिस झारखंड और मॉडल सुरभि ने यहां कैटवॉक किया था.
पूर्व मिस झारखंड व माडल सुरभि ने किया था कचरे के ढेर पर कैटवॉक

रांची. रांची के झिरी में मौजूद कचरे का पहाड़ अब हटाए जाने वाला है. बायो माइनिंग करके इसे हटाने का काम किया जाएगा. सूडा की ओर से इस काम को करने में शुरुआती खर्चा क्या होगा उसका आकलन तैयार किया गया है. इस कचरे को हटाने में कम से कम ढाई सौ करोड़ रुपये खर्च होने वाले है. ऐसे में सूडा ने केंद्रीय शहरी मंत्रालय को पत्र लिखकर इस मामले में रकम उपलब्ध करने की मांग की है. इसके अलावा इस काम के लिए बायो माइनिंग का डीपीआर भी तैयार किया जाएगा. कंसलटेंट तक को चुनने का काम भी हफ्ते भर में हो जाएगा. सूडा की निगरानी में ही जुडको बायो माइनिंग का डीपीआर तैयार होने वाला है.

झिरी के 42 एकड़ जमीन पर ये कचरा फैला हुआ है. 24 से अधिक साल से यहां पर लोग कचरा फेंक रहे हैं. इसी के चलते यहां पर कचरे का पहाड़ खड़ा हो गया है. ये उस वक्त चर्चा में ज्यादा आया जब कुछ दिनों पहले पूर्व मिस झारखंड और मॉडल सुरभि ने सरकार और प्रशासन का ध्यान इस ओर लाने के लिए यहां पर कैटवॉक किया था. इस कचरे को यहां से हटाने के लिए बायो माइनिंग का काम नगर निगम के जरिए किया जाएगा.

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बायो माइनिंग के जरिए कैसे हटेगा कचरा?

इसके जरिए वैज्ञानिक ढंग से कचरे का निस्तारण होगा. जो भी उससे धातुएं निकलेगी उन्हें गलाकर धातु बनाया जाएगा. साथ ही प्लास्टिक को भी गलाकर नया प्लास्टिक बनाया जाएगा. वहीं, बाकी कचरे का इस्तेमाल ईधन बनाने के लिए किया जाएगा. जिन 10 बाकी शहरों में भी कई सालों का जमा कचरा हटाया जाएगा उनमें आदित्यपुर, चास, देवघर, धनबाद, गिरिडीह, हजारीबाग, जमशेदपुर, मानगो और रामगढ़ शामिल है. इसके अंदर भी बायो माइनिंग का इस्तेमाल किया जाएगा.

बायोगैस के लिए हो रही हैं ये तैयारियां

झिरी के अंदर कचरे का निस्तारण करने के लिए गिल बायोगैस प्लांट लगाने वाली है. इसमें 30 करोड़ का खर्च होगा. जो भी नया कचरा झिरी पहुंचेगा तो उससे बायोगैस बनाई जाएगी. इसके लिए टूर ट्रेंचिंग और जमीन के समतलीकरण का काम भी चल रहा है.

सड़क बनते ही किया जाएगा बायोगैस प्लांट का निर्माण

झिरी के अंदर रिंग रोड़ से लेकर बायोगैस प्लांट के लिए चुनी गई साइट तक नगर निगम की ओर से 600 फीट लंबी डबल लेन सड़क को बनाया जाएगा. इसके लिए डीपीआर भी तैयार हो रहा है. डीपीआर पास होने के बाद इसके टेंडर का काम होगा. 6 करोड़ रुपये इसके लिए खर्च होंगे. इस सड़क को बनाने का केवल एक ही मकसद है ताकि गेल को बायोगैस प्लांट लगाने में आसानी हो सकें. सड़क के बनते ही बायोगैस का काम भी शुरू हो जाएगा.

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सीडीसी कंपनी करेगी सूखे कचरे को निपटाने का काम

रांची नगर निगम के जरिए जो सीडीसी कंपनी चुनी गई है वो सूखे कचरे को निस्तारण करने का काम करेगी. इसके लिए मधुकम, नागा बाबा खटाल, खेलगांव और मोरहाबादी में चार केंद्रों को बनाया जा रहा है. 50 डिसमिल जमीन पर इसे बनाया जाएगा. इस काम को करने के लिए मशीनें लगाई जाने वाली हैं.

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