महिलाओं के सम्मान का प्रतीक है टुसू पर्व

Smart News Team, Last updated: Thu, 5th Aug 2021, 6:54 AM IST
  • झारखंड राज्य के पंच परगना क्षेत्र का टुसू पर्व सबसे लोग पी त्योहारों में से एक है. मकर संक्रांति के पर्व के दिन ही मनाया जाने वाला टुसू पर्व महिलाओं के सम्मान का प्रतीक माना जाता है.
महिलाओं के सम्मान का प्रतीक है टुसू पर्व

रांची . टुसू का शाब्दिक अर्थ है कुंवारी कन्या. समृद्धि की भावनाओं से ओतप्रोत टुसू पर्व झारखंड के अलावा पश्चिम बंगाल उड़ीसा में भी मनाया जाता है. यह पर्व ठंड के मौसम में धान की फसल काटने व दो दोनी करने के बाद आता है. वैसे तो झारखंड राज्य के सभी पर्व त्योहार प्रकृति से जुड़े हैं. लेकिन टुसू पर्व का महत्व कुछ विशेष ही है. इस दिन प्रत्येक घर की कन्या शाम के समय टुसू का पूजन करती है.

टुसू पर्व के पीछे एक मान्यता भी है की टुसू एक गरीब किसान की अत्यंत सुंदर कन्या थी. धीरे-धीरे पूरे राज्य में उसकी सुंदरता की चर्चा होने लगी. यह चर्चा तानाशाह राजा के कानों तक भी पहुंची. राजा की नियत डोल गई और उस कन्या को प्राप्त करने के लिए उसने षड्यंत्र रचा. संयोग से इस साल राज्य में भीषण अकाल पड़ गया. किसान लगान देने की स्थिति में नहीं थे. टीटू के पिता की इस हालत का फायदा उठाने के लिए उस तानाशाह राजा ने कृषि का कर तू मना कर दिया और अपने सिपाहियों को किसानों से जबरन कर वसूलने का आदेश जारी कर दिया. राजा के स्थान ऐसा ही आदेश का टुसू ने विरोध करते हुए किसानों का एक संगठन आंदोलन के लिए तैयार कर दिया.

सैनिकों और किसानों के बीच भीषण युद्ध शुरू हो गया. युद्ध में राजा के हजारों सैनिक मारे गए. जो जीवित बचे उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. युद्ध में सैनिकों की गिरफ्त में टुसू भी हंसने वाली थी लेकिन राजा के दरबार में गिरफ्तारी के बजाय उसने पास बह रही स्वर्णरेखा नदी में कूदकर अपनी जान दे दी. तब से लेकर आज तक झारखंड राज्य के समय उड़ीसा पश्चिम बंगाल के लोग टुसू पर्व मनाते चले आ रहे हैं. इस पर्व को महिलाओं के सम्मान के रूप में मनाया जाता है.

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