रांची: किसानों के फायदे के लिए विदेशी फल एवोकाडो पर बीएयू ने शुरू की रिसर्च

Smart News Team, Last updated: 21/11/2020 01:46 PM IST
  • एवोकाडो का फल मैक्सिको में पाया जाता है. इसके दाम भारतीय बाजार में अच्छे मिल जाते हैं. इसके बहुउपयोगी गुणों को देखते हुए कई अन्य राज्यों की ओर से भी इसकी खेती को प्रोत्साहित करने के कदम उठाए जा रहे हैं. इसकी के बिहार कृषि विश्वविद्यालय ने इस फल पर अनुसंधान शुरू किया है.
विदेशी फल एवोकाडो की कृषि से किसानों के लाभ को देखते हुए बीएयू ने शोध शुरू किया है (सांकेतिक चित्र)

रांची. झारखंड की आबो हवा के अनुकूल पाए जाने वाला विदेशी फल एवोकाडो किसानों के लिए फायदे का सौदा हो सकता है. इसी बात को ध्यान में रखते हुए बिरसा कृषि विश्वविद्यालय की ओर से एवोकाडो पर शोध की पहल की है. इसका लाभ प्रदेश के किसानों को पहुंचेगा. बीएयू के कुलपति डॉ. ओंकार नाथ सिंह के परामर्श पर उद्यान विभाग ने इस दिशा में पहल की है. इसी के तहत विश्वविद्यालय के परिसर में टेक्नोलॉजी पार्क में एवोकाडो के 15 पौधों को लगाया गया है.

विश्वविद्यालय के टेक्नोलॉजी परिसर में इस विदेशी फल का पौधारोपण करते हुए कुलपति डॉ. रमेश पांडे एवं बीएयू कुलपति डाॅ. ओंकार नाथ सिंह ने कहा कि इस फल खेती में पानी की ज्यादा जरूरत नहीं होती. इसके बहुउपयोगी गुणों को देखते हुए इस फल के सेवन का देश में प्रचलन काफी बढ़ गया है. जिस कारण कई राज्यों में इसकी खेती को प्रोत्साहित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं. इसकी संभावना के आकलन के लिए बीएयू की तरफ से भी शोध की पहल की गई है. उन्होंने कहा कि अगर राजधानी में इसकी खेती को प्रोत्साहित किया जाता है तो प्रदेश में किसानों को बेहतर आमदनी, ग्रामीण स्तर पर रोजगार व पोषण सुरक्षा तथा निर्यात की संभावना को बल मिलेगा. पौधारोपण के दौरान विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों में डाॅ. एमएस यादव, डाॅ. जगरनाथ उरांव, प्रो डीके रूसिया, डाॅ. अब्दुल वदूद, डाॅ. डीके शाही एवं डाॅ. बधनू उरांव भी मौजूद रहे.

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एवोकाडो फल दक्षिण मध्य मैक्सिको में ज्यादा पाया जाता है. इस फला का विश्व आपूर्ति का करीब 34 प्रतिशत उत्पादन मेक्सिको द्वारा किया जाता है. अमेरिका में लोकप्रिय इस फल की खेती भारत के हिमाचल प्रदेश एवं सिक्किम में भी की जा रही है. भारतीय बाजार में यह 400-1000 रुपये प्रति किलो बिकता है. डॉ. ओंकार नाथ के मुताबिक एवोकाडो फाइबर, ओमेगा -3 फैटी एसिड, विटामिन ए, सी, ई और पोटेशियम से भरपूर पोषक तत्वों से युक्त फल है. इसमें केले से भी अधिक पोटेशियम होता है और तनाव से लड़ने में यह मददगार है. इसके उपयोग से विटामिन बी से भरपूर बेहतरीन भोजन बनता है. इसका वुडस्टॉक केरल व तमिलनाडु से लिया जाता है एवं नर्सरी में तैयार कर इसे लगाया जाता है। इस फल को बीज या कलम द्वारा बोया जा सकता है। कलम वाले पौधे से 4 वर्षों में तथा बीज से बोआई में 5 वर्षों के बाद फल मिलने लगता है.

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