Chhath Puja 2021: क्यों मनाया जाता है महापर्व छठ, इस कथा में जानें छठ मैया की पूरी कहानी

Anurag Gupta1, Last updated: Mon, 8th Nov 2021, 2:13 PM IST
  • लोक आस्था का पर्व छठ 8 नवंबर से शुरू हो रहा है जो 11 नवंबर को अर्घ्य के बाद समाप्त होगा. मान्यता है इसको महिलाएं पुत्र प्राप्ति या पुत्र की लंबी आयु के लिए रखती हैं. कहा जाता है कि एक राजा ने पुत्र प्राप्ति के लिए षष्टी मां की पूजा की थी. पौराणिक कथाएं महाभारत से लेकर रामायण तक का भी जिक्र करती हैं.
(फाइल फोटो)

लोक आस्था का महापर्व छठ लोग बहुत हर्षोल्लास से मनाते हैं. जिसे षष्ठी पूजा कार्तिक शुक्ल के षष्ठी को मनाया जाता है. ये पर्व पूरे चार दिन का होता है जो नहाय खाय के साथ शुरू होता है. इस साल ये पर्व 8 नवंबर से शुरू होकर 11 नवंबर को अर्घ्य देने के साथ ही समाप्त होगा. इस पर्व पर महिलाएं 36 घंटे का निर्जला उपवास रखती है. ये पर्व बिहार, झारखंड, यूपी के पूर्वी जिलों और नेपाल के कुछ क्षेत्रों में ज्यादा मनाया जाता है. अगर देखा जाए तो बिहार के वासी इसे महापर्व की तरह मनाते हैं.

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क्या है छठ पर्व कथा:

महिलाएं छठ व्रत अपने पुत्र की लंबी आयु के लिए करती है. मान्यताओं के हिसाब से एक नगर में प्रियव्रत नाम के एक राजा अपनी पत्नी मालिनी के साथ रहते थे. दोनों के कोई संतान नहीं थी. जिसको लेकर दोनों चिंतित रहते थे. एक दिन दोनों ने संतान प्राप्ति के लिए महर्षि कश्यप का यज्ञ करवाया. इस यज्ञ से राजा-रानी को नौ महीने बाद पुत्र की प्राप्ति हुई लेकिन पुत्र की मौत हो गई. जिससे राजा को काफी दुख हुआ. इस कारण से राजा ने आत्महात्या करने की कोशिश की. उसी दौरान एक देवी प्रकट हुई और उन्होंने राजा से कहा मैं षष्टी देवी हूं. उन्होंने बताया कि मेरी पूजा करने से लोगों के संतान की प्राप्ति होती है. इससे राजा ने खुश होकर उनकी पूजा की.

जिससे राजा और रानी ने कार्तिक शुक्ल की षष्टी तिथि के दिन देवी षष्ठी की पूजा की. इस पूजा के बाद राजा-रानी को पूत्र प्राप्ति हुई. तभी से छठ पर्व मनाने की मान्यता है.

दूसरी मान्यता:

महाभारत से भी एक मान्यता जुड़ी हई है. कहा जाता है कि जब पांडव जुएँ में अपना सारा राजपाट हार गए थे तो द्रौपदी ने व्रत रखा था जिसके बाद पांडव को सारा राजपाट मिल गया था.

तीसरी मान्यता:

पौराणिक मान्‍यताओं के अनुसार एक कहानी ये भी है कि छठ पर्व की शुरुआत महाभारत काल में हुई थी. सबसे पहले सूर्यपुत्र कर्ण ने सूर्य देव की पूजा शुरू की. कर्ण भगवान सूर्य के परम भक्त थे. वह प्रतिदिन घंटों कमर तक पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते थे. सूर्य भगवान की कृपा से ही कर्ण महान योद्धा बने. आज भी छठ में अर्घ्य दान की यही परंपरा प्रचलित है.

चौथी मान्यता:

वैसे तो छठ पर्व लोग पुत्र की प्राप्ती, सलामती और लंबी आयु के लिए करते हैं. लेकिन एक मान्यता है राम जी की लंका पर विजय के बाद की. मान्यता है रामराज्य की स्थापना के दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी को भगवान राम और माता सीता ने उपवास किया और सूर्यदेव की पूजा की. सप्तमी को सूर्योदय के वक्त फिर से अनुष्ठान कर सूर्यदेव से आशीर्वाद प्राप्त किया था.

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