Chhath Puja 2021: रांची में छठ पूजा में सुबह अर्घ्य का समय और पूजा विधि, जानें

Anurag Gupta1, Last updated: Tue, 14th Dec 2021, 5:13 PM IST
  • चार दिन के लोकआस्था के महापर्व पर महिलाएं अपनी संतान की लंबी आयु के लिए उपवास रहती है. छठ पूजा 8 नवंबर से शुरू हो जाएगा. 9 नवंबर खरना, 10 नवंबर को सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा और अंत में 11 नवंबर की सुबह सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा. अर्घ्य देने का शुभ समय सुबह 6:40 पर है सूर्यास्त शाम को 5:30 पर होगा.
छठ पर्व पर सूर्य नमस्कार करती महिलाएं (फाइल फोटो)

हिंदू पंचांग के अनुसार लोकआस्था का महापर्व छठ पूजा कार्तिक माह की षष्ठी से शुरू हो जाता है. इस पर्व की शुरूआत नहाय-खाय से शुरू हो जाती है. ये चार दिन का पर्व उत्सव की तरह मनाया जाता है. माना जाता है छठ पूजा महिलाएं संतान की लंबी आयु के लिए करती है. इस साल दिवाली 4 नवंबर को पड़ी थी उस हिसाब से छठ पर्व 8 तारीख से शुरू हो रहा है. 9 नवंबर के दिन खरना, 10 नवंबर को सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा और अंत में 11 नवंबर की सुबह सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही यह पर्व समाप्त हो जाएगा.

इस घरों में तरह-तरह के पकवान बनते है जिसे काफी साफ-सफाई से तैयार किया जाता है. छठी मईया को भोग लगने के बाद सभी को दिया जाता है. इन चार दिनों घाटों पर एक मेले जैसे महौल रहता है.

पूजा विधि:

नहाय खाय की सुबह गंगा स्‍नान या किसी नदी-तालाब में स्नान करने के बाद सूर्य पूजा के साथ व्रत की शुरुआत करते हैं.

नहाय खाय के दिन व्रती चना दाल के साथ कद्दू की सब्जी और चावल तैयार करते हैं और इसे ही खाया जाता है.

इसके अगले दिन खरना किया जाता है. खरना में व्रती पूरे दिन निराहार रहकर शाम में मिट्टी के चूल्हे पर गुड़ और चावल की खीर, पूरी बनाकर छठ मैय्या को भोग लगाते हैं. इसी प्रसाद को खाकर व्रती छठ व्रत समाप्त होने तक निराहार रहकर व्रत का पालन करते हैं.

खरना के अगले दिन अस्तगामी सूर्य को नदी, तलाब के किनारे अर्घ्य दिया जाता है इसके साथ ही व्रती 36 घंटे के निर्जला व्रत को प्रारंभ करते हैं.

अर्घ्य का शुभ मुहूर्त:

11 नवंबर 2021 सूर्योदय का समय सुबह 6 बजकर 40 मिनट.

सूर्यास्त समय शाम 5:30

द्रोपदी ने रखा था छठ व्रत:

रामायण और महाभारत की पौराणिक कथाओं के हिसाब से एक मान्यता ये भी है जब पांडव अपना सारा राजपाट जुए में हार गए, तब द्रौपदी ने छठ व्रत रखा. उनकी मनोकामनाएं पूरी हुईं और पांडवों को राजपाट वापस मिल गया. लोक परंपरा के अनुसार, सूर्य देव और छठी मईया का संबंध भाई-बहन का है. इसलिए छठ के मौके पर सूर्य की आराधना फलदायी मानी गई है.

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