अभी भी समाज की मुख्यधारा से कटे हैं दिव्यांग

Smart News Team, Last updated: 04/12/2020 09:35 PM IST
  • इससे सरकारी मशीनरी की असफलता ही कहेंगे कि आजादी के इतने सालों बाद भी दिव्यांग जनों को समाज की मुख्यधारा में जोड़ने के कार्य को सफलता नहीं मिल सकी है. आज भी दिव्यांग हीन भावना से ग्रसित है.
फाइल फोटो

रांची . यह बात दिव्यांग अधिकार मंच के संयोजक अजीत कुमार ने कही है. बताते हैं कि वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार देश की कुल आबादी की 2.11% आबादी दिव्यांग जनों की है. तमाम सरकारी योजनाएं जमीनी धरातल पर संचालित होने के बाद भी दिव्यांगों को पूरी तरह इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है. आज भी समाज में 80% दिव्यांग सरकारी योजनाओं से वंचित हैं.

यह सरकारी मशीनरी की असफलता ही कहीं जाएगी. संयोजक अजीत कुमार बताते हैं कि संयुक्त राष्ट्र संघ ने वर्ष 1992 में एक घोषणा पत्र के माध्यम से विश्व स्तर पर अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस मनाने का निर्णय लिया था. 28 साल बाद भी इसकी प्रासंगिकता को मूर्त रूप नहीं मिल सका है. किंतु इस बार संयुक्त राष्ट्र संघ ने कोविड-19 के बाद दिव्यांगों के समावेशी सुगम एवं सतत विकास विषय के रूप में अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस मनाने का फैसला किया है.

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उन्होंने बताया कि दिव्यांग जनों के लिए बनाए गए कानून और नियमों का सही तरीके से क्रियान्वयन ना हो पाने के कारण आज भी 80 फ़ीसदी दिव्यांगजन समाज की मुख्यधारा से नहीं जुड़ पाए हैं. उन्होंने दिव्यांग जनों के लिए झारखंड सरकार से सशक्त नीति बनाए जाने की मांग की है.

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