पूर्णिमा स्नान के साथ आज से 15 दिन का पितृपक्ष 2021 शुरू, ऐसे करें पितरों का तर्पण

Anuradha Raj, Last updated: Mon, 20th Sep 2021, 6:07 PM IST
  • पितृ पक्ष की आज से शुरुआत हो चुकी है. इस दौरान जो भी अपने पितरों का विधि-विधान के संग तर्णन करता है, उनके पितर खुश होकर उन्हें आशीर्वाद देते हैं.
पितृ पक्ष 2021

सोमवार यानी आज 20 सितंबर से पूर्णिमा के श्राद्ध के साथ ही पितृपक्ष की शुरुआत हो चुकी है. इस मौके पर लोगों ने हरिद्वार के गंगा घाट पर स्नान आदि करके पितरों का पूजन किया. पूर्वजों की आत्माशांति के लिए श्राद्ध पक्ष के दौरान 16 दिनों तक नियम पूर्वक करने का विधान माना जाता है. आचार्य डॉ सुशांत राज के अनुसार भाद्रपद मास में पड़ने वाली पूर्णिमा तिथि से पितृ पक्ष शुरू हो जाता है. पितरों को पितृ पक्ष के दौरान याद करते हैं, साथ ही उनकी आत्मा की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध कर्म आदि करते हैं. श्राद्ध के महत्व के बारे में वायु पुराण, मत्स्य पुराण, गरुड़ पुराण और विष्णु पुराण समेत अन्य सभी शास्त्रों में बताया गया है.

जो व्यक्ति पितरों की आत्मा की तृप्ति करता है, उसे पितृ दोष नहीं लगता है. 20 सिंतबर से आरंभ होकर ये पितृ पक्ष 6 अक्टूबर तक चलने वाला है. पूर्णिमा श्राद्ध, महाभरणी श्राद्ध और सर्वपितृ अमावस्या का पितृ पक्ष में बहुत महत्व होता है. ब्रह्म वैवर्त पुराम में ऐसा वर्णन किया गया है कि देवताओं को प्रसन्न करने से पहले मनुष्य को अपने पितरों को जरूर प्रसन्न करना चाहिए. पितृ दोष को ज्योतिष के अनुसार अनुसार सबसे जटिल कुंडली दोष माना जाता है.

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इतना ही नहीं बल्कि हर साल भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से आश्विन कृष्ण अमावस्या तक तक के काल में पितरों की शांति के लिए पितृ पक्ष श्राद्ध किया जाता है. ऐसी मान्यता है कि कुछ समय के लिए यमराज इस दौरान पितरों को आजाद कर देता है. जिससे उनके परिजन श्राद्ध को ग्रहण कर सकें. जिसका निधन जिस तिथि को हुआ रहता है, उसका श्राद्ध उसी दिन किया जाना चाहिए.

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