Ganesh Jayanti 2022: संतान प्राप्ति के लिए रखें गणेश जंयती पर व्रत, जरूर सुने ये कथा

Pallawi Kumari, Last updated: Sun, 23rd Jan 2022, 4:55 PM IST
  • माघ मास में सकट चौथ के बाद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में गणेश जयंती मनाई जाती है. संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले भी इस दिन व्रत व पूजन करते हैं. इस बार गणेश जयंती का त्योहार 4 फरवरी को है. आइये जानते हैं इस दिन कैसे करें पूजा और क्या है गणेश जयंती की व्रत कथा.
गणेश जयंती (फोटो-लाइव हिन्दुस्तान)

वैसे तो हर महीने शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि और हफ्ते में बुधवार के दिन श्री गणेश की पूजा करना शुभ माना जाता है. ये दिन श्री गणेश की पूजा के लिए मंगलाकरी और फलदायी होते हैं. इस समय माघ का महीना चल रहा है और माघ के महीने में भगवान गणेश की एक नहीं बल्तक दो विशेष पूजा होती है. माघ में सकट चौथ और गणेश जयंती का त्योहार मनाया जाता है. 

21 जनवरी को माताओं के संतान की दीर्घायु के लिए सकट चौथ व्रत रखा. वहीं इसके बाद 4 फरवरी को गणेश जी के जन्मोत्सव के रूप में गणेश जयंती मनाई जाएगी. कहा जाता है कि संतान की इच्छा रखने वाले यदि इस दिन व्रत व पूजन करते हैं तो उनकी मनोकामना जरूर पूरी होती है. गणेश जयंती के दिन भगवान की विशेष पूजा पाठ की जाती है और गणेश जी की जन्म की कथा सुनी जाती है. इस दिन पूजा में ये कथा सुनना या पढ़ना आवश्यक माना जाता है. इसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है. 

गणेश जयंती की कथा के अनुसार इस दिन भगवान शिव ने श्रीगणेश को नया जीवन दिया था. इसलिए इस दिन को गणेश जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है.आइये जानते हैं क्या है गणेश जयंती की व्रत कथा.

Ganesh Jayanti 2022: माघ मास में कब है विनायक चतुर्थी, दो शुभ योग में होगी श्री गणेश पूजा

कथा के अनुसार- एक दिन जब माता पार्वती स्नान करने जा रही थीं तो उन्होंने द्वार पर पुत्र गणेश को पहरा देने के लिए कहा. माता पार्वती ने कहा कि जब तक मैं स्नान कर बाहर न आऊं तब तक किसी को भी भीतर नहीं आने देना. माता की आज्ञा का पालन करते हुए भगवान गणेश द्वार पर पहरा देने लगे. इस बीच भगवान शिव वहां पहुंचे और भीतर जाने लगे लेकिन गणेश जी ने पिता को भीतर नहीं जाने दिया. भगवान शिव की तमाम कोशिशों के बाद भी गणेश जी ने उन्हें भीतर नहीं जाने दिया. इससे शिव जी क्रोधित हो गए उन्होंने इसे अपना अपमान समझ लिया और गुस्से में बालक गणेश के सिर धड़ से अलग कर दिया. 

माता पार्वती जब स्नान कर बाहर आई तो पुत्र गणेश की अवस्था देख भगवान शिव से पुत्र गणेश का सिर जोड़कर जीवित करने का आग्रह किया. इसके बाद शिव जी ने एक हाथी के बच्चे का सिर गणेश के धड़ से जोड़ दिया. पुत्र को फिर से जीवित पाकर माता पार्वती प्रसन्न हुई.

Ganesh Jayanti 2022: कब है गणेश जयंती, पूजा में बप्पा को भूलकर भी न चढ़ाएं ये चीजें

 

अन्य खबरें