Govardhan Puja 2021: दिवाली के अगले दिन क्यों की जाती है गोवर्धन पूजा, जानें कैसे हुई इसकी शुरुआत

Pallawi Kumari, Last updated: Fri, 5th Nov 2021, 7:52 AM IST
  • हिंदू धर्म में दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा की जाती है. इस दिन घर के आंगन, छत या बालकनी में गोबर से गोवर्धन बनाए जाते हैं और पूजा की जाती है. गोवर्धन पूजा को अन्नकूट, पड़वा और प्रतिपदा भी कहा जाता है.क्या जानते हैं कि दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा क्यों की जाते हैं और परंपरा की शुरुआत कैसे हुई.
कब से शुरू हुई गोवर्धन पूजा.

हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि और दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा करने का विधान है. इस दिन घर के छत, आंगन या बालकनी में गोबर से गोवर्धन बनाकर उसकी पूजा की जाती है. वहीं भगवान को 56 भोग भी लगाया जाता है. लोग हर साल विधि विधान से गोवर्धन पूजा के दिन गौ माता की पूजा की जाती है. इसे अन्नकूट, पड़वा और प्रतिपदा के नाम से भी जाना जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि गोवर्धन पूजा दिवाली के ही अगले दिन क्यों की जाती है और कब से इस परंपरा और पूजा की शुरुआत हुई.  अगर नहीं तो ये खबर आपके लिए ही है.

कैसे हुई गोवर्धन पूजा की शुरुआत- धार्मिक मान्यताओं अनुसार जब एक बार देव राज इंद्र को अपनी शक्तियों का घमंड हो गया था, तब उन्होंने ब्रज में तेज बारिश की थी.  तब भगवान श्रीकृष्ण ने गोकुलवासियों को इन्द्र के प्रकोप से बचाने के लिए अपनी छोटी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रज वासियों की मूसलाधार बारिश से रक्षा की थी. इससे ब्रजवासी और ब्रज के पशु पक्षियों की रक्षा हो सकी. इंद्रदेव को जब इस बात का ज्ञात हुआ कि भगवान श्री कृष्ण ही भगवान विष्णु के अवतार हैं तो उनका अहंकार टूट गया और फिर इंद्र ने भगवान श्री कृष्ण से क्षमा मांगी.

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 कृष्ण की इस लीला से मूसलाधार बारिश में भी गोवर्धन पर्वत के नीचे सभी गोप-गोपियाँ, ग्वाल-बाल, पशु-पक्षी सुख बारिश से बचकर रहे. इस घटना के बाद से ही गोवर्धन पूजा मनाने की शुरुआत हुई. लोग गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाकर इसकी पूजा करते हैं. इस दिन घर के पालतू पशु गाय, बछड़ा, आदि की पूजा की जाती है.

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