निजी आढ़तियों को औने पौने दाम में फसल बेचने को मजबूर हो रहे किसान, जाने क्यों

Smart News Team, Last updated: 12/12/2020 10:10 PM IST
  • मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरकार की ओर से इस बार धान खरीद केंद्र न खोले जाने के कारण राज्य भर के किसान बिचौलियों के हाथों कठपुतली बनने को मजबूर हो रहे हैं. हालत यह है कि निजी आढ़तों पर ओने पौने दाम में किसान अपनी फसल को बेचने के लिए विवश हैं.
फाइल फोटो

रांची. बता दें कि इस साल किसानों की धान की फसल उम्मीद से भी कहीं बेहतर हुई है. इसके बावजूद भी किसानों को इसका पूरा प्रतिफल नहीं मिल पा रहा है. इसका प्रमुख कारण झारखंड सरकार की ओर से धान खरीद सत्र 2020 में सरकारी क्रय केंद्रों का नकुल आ जाना है. जिसकी वजह से केंद्र सरकार की ओर से बेहतर समर्थन मूल्य घोषित होने के बाद भी राज्य भर के किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है. हालत यह है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित होने के बाद भी सरकार की ओर से सरकारी धन क्रय केंद्र संचालित ना होने की वजह से राज्य भर के के किसान अपनी फसल को मजबूरी बस बिचौलियों और निजी आढ़तियों के हाथों बेचने को विवश हैं. बिचौलिए और आढ़तिये भी किसानों की इस मजबूरी का दोनों हाथों से लाभ उठाकर उन्हें लूटने में लगे हैं. परिणाम स्वरूप किसान अपनी आवश्यकताओं और सरकारी तंत्र की विफलताओं को कोसते हुए अपनी फसल को न्यूनतम समर्थन मूल्य से आधी कीमत पर बेचने को मजबूर हो रहे हैं.

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शनिवार को गल्ला मंडी हाय रांची क्षेत्र के किसानों ने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2050 प्रति कुंटल निर्धारित किया है. सरकारी क्रय केंद्रों पर तालाबंदी होने से वह अपनी फसल को मात्र 12 सो रुपए प्रति कुंतल के भाव से बेच दिए हैं. इन किसानों का आरोप है कि झारखंड सरकार का यह दावा कि किसानों का धान गीला है बिल्कुल बेबुनियाद है जबकि हकीकत यह है कि साहूकारों बिचौलियों और निजी आढ़तियां की जेबे भरने के लिए ही सरकारी धान क्रय केंद्र नहीं खोले जा रहे हैं. किसानों का यह भी कहना था कि रबी फसल चक्र की फसलों का बुवाई का समय है इसलिए किसानों को अपनी धान बेचने की भी मजबूरी है जिसका दोनों हाथों से लाभ उठाया जा रहा है. किसानों के साथ हो रहे अन्याय पर अपनी आवाज बुलंद करते हुए किसानों ने मुख्यमंत्री से जल्द से जल्द सरकारी क्रय केंद्र खोले जाने की मांग की है.

बता दें कि हेमंत सरकार ने गत एक दिसंबर से सरकारी धान क्रय केंद्र खोले जाने का आश्वासन दिया था किंतु अब तक उनकी ओर से इन केंद्रों को खोलने की अनुमति प्रदान नहीं की गई है. इससे धान किसानों में सरकार के प्रति बेहद नाराजगी है.

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