गुरुवार को नारायण स्त्रोत का पाठ करने से बरसती है भगवान विष्णु की कृपा

Anuradha Raj, Last updated: Tue, 21st Sep 2021, 4:05 PM IST
  • गुरुवार का दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है. हिंदू धर्म में इस दिन का बहुत ही महत्व होता है. जो लोग गुरुवार को विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है.
गुरुवार का व्रत

श्री हरि विष्णु को गुरुवार का दिन समर्पित होता है. ऐसे में भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा अर्चना करनी चाहिए, साथ ही व्रत भी रखना चाहिए. उनके भक्तों के बीच कई नाम प्रचलित है. नारायण और इसी नाम से जोड़कर विष्णु जी के और भी कई नाम हैं, जैसे लक्ष्मीनारायण, शेषनारायण और अनंतनारायण आदि है. शास्त्रों के अनुसार श्री हरि विष्णु को नारायण स्तोत्रम् समर्पित होता है. ऐसी मान्यता है कि जो मनुष्य इस पाठ को करता है तो उसकी सभी मनोकामाना पूर्ण हो जाती है. विष्णु जी को ये पाठ अतिप्रिय होता है, जिसे बहुत ही ज्यादा सरल माना जाता है. इसे पठकर हर कोई लाभ प्राप्त कर सकता है. तो ऐसे में हम आपके सामने शेयर करने जा रहे हैं श्री नारायण स्त्रोत

श्री नारायण स्त्रोत

नारायण नारायण जय गोविंद हरे ॥

नारायण नारायण जय गोपाल हरे ॥

करुणापारावारा वरुणालयगम्भीरा ॥

घननीरदसंकाशा कृतकलिकल्मषनाशा ॥

यमुनातीरविहारा धृतकौस्तुभमणिहारा ॥

पीताम्बरपरिधाना सुरकल्याणनिधाना ॥

मंजुलगुंजाभूषा मायामानुषवेषा ॥

राधाऽधरमधुरसिका रजनीकरकुलतिलका ॥

मुरलीगानविनोदा वेदस्तुतभूपादा ॥

बर्हिनिवर्हापीडा नटनाटकफणिक्रीडा ॥

वारिजभूषाभरणा राजिवरुक्मिणिरमणा ॥

जलरुहदलनिभनेत्रा जगदारम्भकसूत्रा ॥

पातकरजनीसंहर करुणालय मामुद्धर ॥

अधबकक्षयकंसारे केशव कृष्ण मुरारे ॥

हाटकनिभपीताम्बर अभयं कुरु मे मावर ॥

दशरथराजकुमारा दानवमदस्रंहारा ॥

गोवर्धनगिरिरमणा गोपीमानसहरणा ॥

शरयूतीरविहारासज्जनऋषिमन्दारा ॥

विश्वामित्रमखत्रा विविधपरासुचरित्रा ॥

ध्वजवज्रांकुशपादा धरणीसुतस्रहमोदा ॥

जनकसुताप्रतिपाला जय जय संसृतिलीला ॥

दशरथवाग्घृतिभारा दण्डकवनसंचारा ॥

मुष्टिकचाणूरसंहारा मुनिमानसविहारा ॥

वालिविनिग्रहशौर्या वरसुग्रीवहितार्या ॥

मां मुरलीकर धीवर पालय पालय श्रीधर ॥

जलनिधिबन्धनधीरा रावणकण्ठविदारा ॥

ताटीमददलनाढ्या नटगुणविविधधनाढ्या ॥

गौतमपत्नीपूजन करुणाघनावलोकन ॥

स्रम्भ्रमसीताहारा साकेतपुरविहारा ॥

अचलोद्घृतिञ्चत्कर भक्तानुग्रहतत्पर ॥

नैगमगानविनोदा रक्षःसुतप्रह्लादा ॥

भारतियतिवरशंकर नामामृतमखिलान्तर ॥

। इति श्रीमच्छंकराचार्यविरचितं नारायणस्तोत्रं सम्पूर्णम्‌ ।

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