नई किसान बिल में नहीं कोई खोट बस दूषित है राजनीतिक सोच

Smart News Team, Last updated: 12/12/2020 10:19 PM IST
  • जहां एक और किसानों की बड़ी संख्या किसान बिल को लेकर राजनीतिक दलों की कठपुतली बनी हुई है. वहीं कुछ पढ़े लिखे शिक्षित जागरूक ऐसे किसान भी हैं जो किसान मिलकर समर्थन में है. इन किसानों का दावा है कि एक बार देशभर में किसान बिल लागू हो जाए तो इससे हम किसानों की सूरत ही बदल सकती है.
फाइल फोटो

रांची. टपक विधि से विशुद्ध ऑर्गेनिक खेती करने वाले स्नातक की शिक्षा प्राप्त कर ली पर जमीन लेकर खेती करने वाले प्रगतिशील किसान सुंदर महतो कहते हैं कि वह प्रति एकड़ एक से डेढ़ लाख रुपए प्रतिवर्ष की आय प्राप्त कर रहे हैं. किसान बिल के खिलाफ चल रहे आंदोलन के संबंध में उनका कहना है कि इस आंदोलन में ज्यादातर ऐसे किसान शामिल हैं जिन्हें अभी तक केंद्र सरकार की ओर से लाए गए किसान बिल के बारे में जानकारी ही नहीं है. ऐसे किसान राजनीतिक दलों की कठपुतली बनकर आंदोलन के माध्यम से देश के माहौल को गर्म कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि मोदी सरकार की ओर से लाया गया किसान बिल यदि देशभर में प्रभावी हो जाएगा तो इससे किसानों को बहुत लाभ मिलेगा. अपनी फसल को उस राज्य में बेचने का हक प्राप्त कर लेगा जिस राज्य में उसकी फसल को सबसे अधिक कीमत दी जा रही है. यही नहीं साकभाजी खेती से जुड़े किसान भी अपनी सब्जियों को मनचाही मंडी में बेच सकेंगे. जिसका सीधा लाभ किसानों को मिलने लगेगा. किसानों की फसल बिक्री और किसान के बीच बिचौलियों का काम पूरी तरह खत्म हो जाएगा. इससे किसानों को उनकी फसल का पूरा पैसा उनके जेब में आएगा जिससे उनकी आर्थिक स्थिति चंद सालों में सुधर जाएगी.

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इसी तरह इंजीनियरिंग का क्षेत्र छोड़कर फार्मिंग के व्यवसाय में उतरा युवा किसान बृजेश मुंडा कहते हैं कि किसान बिल के विरोधी आंदोलनरत किसानों में भ्रम फैला रहे हैं कि आवश्यक वस्तु अधिनियम में चावल दाल गेहूं फल सब्जी आज की संग्रहण सीमा समाप्त कर दी गई है. यह तथ्य तो किसानों के हित में ही हुआ है. देशभर के किसान फल सब्जियों और अनाज का बहुत अच्छा उत्पादन कर रही हैं. भंडारण क्षमता लिमिट पर पाबंदी हटाए जाने से इसका सीधा लाभ किसानों को ही मिलने वाला है. किसान इन फसलों पहले बिचौलिए और निजी आढ़तियां के माध्यम से बेचा करता था. किसान बिल में आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत भंडारण क्षमता की लिमिट समाप्त हो जाने से अब यही किसान अपनी फसलों को सीधे तौर पर थोक बाजार में बेचकर मुनाफा प्राप्त कर सकेगा.

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