Palmistry: हथेली में छिपे हैं जीवन के कई राज, इन शुभ चिन्हों से होती है अच्छे फलों की प्राप्ति

Pallawi Kumari, Last updated: Mon, 7th Mar 2022, 10:55 AM IST
  • Palmistry: हथेली पर बने चिह्न मात्र रेखाएं नहीं बल्कि इन हस्त रेखा विज्ञान के अनुसार हथेली की रेखाओं को मां लक्ष्मी से जोड़ा गया है. इसमें लक्ष्मी योग, राजलक्ष्मी योग,गजलक्ष्मी योग और धनपति योग के बारे में बताया गया है. इसलिए हथेली की रेखाएं जीवन के लिए महत्पूर्ण मानी जाती हैं.
हस्तरेखा (फोटो साभार-लाइव हिन्दुस्तान)

Palmistry: किसी व्यक्ति की हथेली देखकर उसके जीवन के बारे में काफी कुछ बताया जा सकता है. इसलिए ज्योतिष शास्त्र में हस्तरेखा विज्ञान महत्वपूर्ण मानी जाती है. वैसे तो व्यक्ति के कर्मों के अनुसार उसकी हथेली की रेखाएं बदलती रहती है. इसलिए जीवन में व्यक्ति को कभी अच्छे तो कभी बुरै दौर का सामना करना पड़ता है. हम सोच में पड़ जाते हैं कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है. दरअसल ये सब आपकी हथेली की रेखाओं के कारण होता है, ज्योतिष शास्त्र में हथेली पर उपस्थित चिह्नों को लक्ष्मी योग, राजलक्ष्मी योग, गजलक्ष्मी योग और धनपति योग के साथ जोड़ा गया है. आइये इनके बारे में जानते हैं विस्तार से.

लक्ष्मी योग- इस तरह के हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार जिस व्यक्ति की हथेली पर चंद्रमा, शुक्र और बुध पर्वत विकसित होने के साथ रंग लाल होता है तो इसे लक्ष्मी योग कहा जाता है. ऐसे लोगों पर माता लक्ष्मी की असीम कृपा रहती है और उन्हें आर्थिक संकट का सामना नहीं करना पड़ता. ऐसे व्यक्तियों के अच्छे योग का लाभ इनके जीवनसाथी को भी मिलता है.

राजलक्ष्मी योग- हस्तरेखा शास्त्र के मुताबिक ऐसे योग वाले लोग जिनकी हथेली पर चंद्र, शुक्र, सूर्य, बुध और गुरु पर्वत पुष्ट होता है उनका राजलक्ष्मी योग बनता है. ऐसे लोगों को किसी भी कार्यों में जल्दी तरक्की मिलती है. हथेली पर इस तरह के शुभ चिन्ह वाले लोगों को कभी भी पैसों की कमी नहीं होती.

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धनपति योग- जीवन रेखा और भाग्य रेखा जिस व्यक्ति की हथेली पर एक दूसरे दूर होती है तो धनपति योग कहताला है. इस तरह योग वाले व्यक्ति के जीवन में धन का अभाव नहीं होता और मां लक्ष्मी इन पर मेहरबान रहती हैं.

गजलक्ष्मी योग - जब दोनों हथेलियों की भाग्य रेखा मणिबंध से सीधा शनि पर्वत तक जा रही है तो ऐसे में गजलक्ष्मी योग का बनता है. वहीं जिनकी हथेलियों की सूर्य रेखा पतली और लाल होने के साथ साथ ही आयु रेख, मस्तिक रेख और स्वास्थ्य रेख साफ नजर आती है तब भी गजलक्ष्मी योग बनता है. ऐसे लोगों को किसी धन्ना सेठ की तरह सुख और सम्मान मिलता है.

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