किसानों को चिंता में डाल रही महंगे आलू बीज की खरीद

Smart News Team, Last updated: 03/11/2020 06:00 PM IST
  • दोबारा आलू बुआई के लिए तैयार किसान महंगे आलू को खरीदने के लिए हताश और परेशान है.वजह साफ है कि आलू का महंगा बीज खरीद कर किसान फसल के टाइम दोबारा भाव गिरने की चिंता कर रहे हैं.
दिन पर दिन आलू की महंगाई से किसान परेशान

राँची. लॉक डाउन के दौरान बाजार में सस्ता मिलने वाले आलू के भाव अब आसमान को छू रहे हैं. आलू के बढ़े भाव जहाँ घर की रसोई को मंहगा कर रहे हैं वहीं दोबारा आलू बुआई के लिए तैयार किसान महंगे आलू को खरीदने के लिए हताश और परेशान है. वजह साफ है कि आलू का महंगा बीज खरीद कर किसान फसल के टाइम दोबारा भाव गिरने की चिंता कर रहे हैं.बीज बुआई व सिंचाई के बाद आलू निकालने तक आ रहे खर्चे को देखते हुए किसान अब आलू की खेती को जोखिम भरा मानकर चल रहे हैं और इसे करने में कतरा रहे हैं.

मौसम की दृष्टि से आलू की बुआई का कार्य अक्टूबर से शुरू होकर 15 नवंबर के आसपास तक कर दिया जाता है. कुछ जगह सुविधाएं मुहैया होने से यह कार्य पहले से ही होने लगता है. अभी चल रहे उछले भाव की वजह से किसानों ने बड़ा आलू होने से पहले ही खोदना शुरू कर दिया है जिस वजह से रांची, खूटी और आसपास के कुछ इलाकों से अगाती आलू अभी से बाजार में आना शुरू हो गया है. पर कायदे से देखा जाए तो मुख्य फसल फसल जनवरी से फरवरी के बीच में ही आएगी.

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इस वक़्त बुवाई का सीजन है जबकि आलू के दामों से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा रही हैं. किसानों के अनुसार वर्तमान में उन्हें आलू का बीज 1800 से 2500 रुपये प्रति क्विंटल खरीदना पड़ रहा है. वहीं मुख्य वजह यह भी है कि जब तक फसल तैयार हो जाएगी और वो उत्पाद लेकर बेचने जाएंगे तो माल के अचानक बढ़ोत्तरी से बिचौलियों व व्यापारियों द्वारा उनका माल अधिकतम 700 से 800 रुपये क्विंटल में खरीदा जाएगा. ऐसे में लागत और चार महीने की मजदूरी निकाल पाना भी उनके लिए बहुत मुश्किल होगा.सरकार की ओर से आलू की खरीद का रेट तय नहीं होने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है जबकि बिचौलियों व व्यापारियों द्वारा उसी माल को कोल्ड स्टोरेज कराकर कर बेचने में मुनाफा ही मुनाफा है.

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