बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में विदेशी फल एवाकाडो पर अनुसंधान शुरू

Smart News Team, Last updated: 21/11/2020 03:23 PM IST
  • इनका पौधरोपण रांची विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. रमेश पांडे एवं बीएयू कुलपति डाॅ. ओंकार नाथ सिंह ने किया. अनुसंधान के दौरान फल यदि झारखंड के वातावरण में सरसब्ज हुआ तो यहाँ के किसानों के लिए यह बड़ी खुशखबरी होगी.
झारखंड के बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में अनुसंधान की शुरुआत

रांची. सिक्किम व हिमाचल प्रदेश में सफलतापूर्वक की जा रही विदेशी फल एवोकाडो की खेती से झारखंड के किसानों को भी लाभान्वित करने की तैयारी है. रांची के बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में एवोकाडो पर अनुसंधान की शुरुआत कर दी गई है. बीएयू कुलपति डाॅ. ओंकार नाथ सिंह के परामर्श पर उद्यान विभाग ने इस दिशा में कदम बढ़ाया है. शुरुआत में यूनिवर्सिटी परिसर में मौजूद टेक्नोलॉजी पार्क के तीसी फसल प्रक्षेत्र के मेढ़ पर एवोकाडो के पंद्रह पौधों को लगाया गया है. इनका पौधरोपण रांची विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. रमेश पांडे एवं बीएयू कुलपति डाॅ. ओंकार नाथ सिंह ने किया. अनुसंधान के दौरान फल यदि झारखंड के वातावरण में सरसब्ज हुआ तो यहाँ के किसानों के लिए यह बड़ी खुशखबरी होगी.

जानकारी के लिए आपको बता दें कि विदेशी फल एवोकाडो फाइबर, ओमेगा -3 फैटी एसिड, विटामिन ए, सी, ई और पोटेशियम से भरपूर होता है. वहीं विटामिन बी भी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है. तनाव से लड़ने में तो यह फल रामबाण साबित हुआ है. सबसे ज़्यादा एवोकाडो दक्षिण मध्य मैक्सिको में पाया जाता है. विश्व आपूर्ति का करीब 34 प्रतिशत उत्पादन मेक्सिको द्वारा किया जाता है. अमेरिका में लोकप्रिय इस फल की खेती भारत के हिमाचल प्रदेश एवं सिक्किम में भी की जा रही है. इस बहुउपयोगी गुणों से युक्त फल के सेवन का देश में प्रचलन काफी बढ़ गया है. कई राज्यों में इसकी खेती को बढ़ावा देने की कोशिश चल रही है.

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झारखंड में भी इस फल की संभावना के आकलन के लिए बीएयू ने शोध की पहल की है. राज्य में इसकी खेती को बढ़ावा मिलने से पोषण सुरक्षा व किसानों को आमदनी का बेहतर ज़रिया मिलेगा वहीं विदेशों में फल की डिमांड को देखते हुए इसके निर्यात की संभावना भी बढ़ेगी. कीमत की बात करें तो भारतीय बाजार में यह 400-1000 रुपये प्रति किलो बिकता है. एवाकाडो के एक पौधे को उपज देने में अधिकतम आठ साल लगते हैं.बीएयू के उद्यान विभाग के अध्यक्ष डॉ केके झा ने बताया कि एवोकाडो की खेती सिक्किम एवं हिमाचल प्रदेश राज्यों में सफलतापूर्वक की जा रही है. इसके अलावा तमिलनाडु राज्य के पहाड़ी ढलानों, महाराष्ट्र, केरल और कर्नाटक के सीमित क्षेत्रों में इसकी शुरुआत हो गयी है. राज्य में उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कोलकाता से एवोकाडो के कलम वाले पौधे को मंगा कर यहां वृक्षारोपण किया गया है.

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