मत्स्य विभाग की योजना से जुड़ कर मछली पालन कर अपने जीवन को बना रहे खुशहाल

Smart News Team, Last updated: Fri, 12th Feb 2021, 7:32 PM IST
  • राजधानी रांची में आकर मछली पालन करके विस्थापित परिवार आज खुशहाल नजर आ रहे हैं. केज कल्चर से मछली पालन ने उनकी जिंदगी को बदल दिया है. इस कार्य में उनकी मदद को राज्य सरकार से लेकर जिला प्रशासन और विभागीय अफसर साथ खड़े नजर आ रहे हैं.
मछली पालन  (प्रतीकात्मक तस्वीर)

रांची : ऐसे ही विस्थापित परिवारों में से एक बालेश्वर गंझू का परिवार है जो कुछ साल पहले सिलोनगोडा माइंस परियोजना के कारण विस्थापित हो गए थे. पहले यह परिवार खेती किसानी कर बमुश्किल अपनी आजीविका चला रहा था. बाद में यह परिवार मत्स्य विभाग की योजना से जुड़ा और केज कल्चर विधि से मछली पालन करना शुरू कर दिया. शुरुआती दौर में बालेश्वर के सामने मुश्किलें आए लेकिन इन मुश्किलों को उन्होंने राज्य सरकार जिला प्रशासन और विभागीय अफसरों की मदद से दूर कर लिया.

आज बालेश्वर और उसका परिवार मछली पाल कर उससे होने वाली ऐसे खुशहाल है. इतना ही नहीं बालेश्वर आज खलारी प्रखंड मत सजीव सहयोग समिति लिमिटेड के अध्यक्ष भी हैं. बताते हैं कि सीमित में कई विस्थापित परिवार है.इन सभी को रांची जिला प्रशासन की ओर से पांच केज कल्चर उपलब्ध कराया गया है. इसमें मछली पालन किया जा रहा है. इसके अलावा उन्हें जिला प्रशासन की ओर से पांच लाइफ जैकेट एक नाव शेड हाउस चारा और मछली का बीज भी प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराया गया है. 

रांची : कपड़ों की समर कलेक्शन से सजे रांची के बाजार

रांची जिला के मत्स्य अधिकारी डॉ अनूप कुमार चौधरी बताते हैं कि वित्तीय वर्ष 2019-20 मैं शासन की ओर से केज विधि से मछली पालन की स्वीकृति दी गई थी. बताते हैं कि केज मत्स्य पालन की एक नई तकनीकी है. इसके तहत कोलफील्ड माइंस व स्टोन माइंस के जलाशयों में लोगों की सहभागिता से मछली पालन किया जा रहा है. इससे विस्थापित परिवारों सहित बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है.

 

अन्य खबरें