वाराणसी को कोरोना से बचाने की लड़ाई लड़ते कोविड 19 से शहीद हो गए ACMO जंगबहादुर

Smart News Team, Last updated: 12/08/2020 03:26 PM IST
  • वाराणसी को कोरोना से बचाने की लड़ाई लड़ते एसीएमओ जंगबहादुर कोविड 19 से शहीद हो गए. चार महीनों से वो जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था को सुनिश्चित कर रहे थे. कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद उनका इलाज बीएचयू कोविड अस्पताल में चल रहा था.
वाराणसी को कोरोना से बचाने की लड़ाई लड़ते कोविड 19 से शहीद हो गए ACMO जंगबहादुर

वाराणसी के एडिशनल सीएमओ जंगबहादुर की कोरोना से मौत हो गई. एडिशनल सीएमओ जिला स्वास्थ्य विभाग का बेहद अहम हिस्सा होते हैं. कोरोना काल में कोरोना वारियर ने इसी बीमारी से दम तोड़ दिया. पिछले चार महीनों से जंगबहादुर वाराणसी को कोरोना से बचाने में जुटे हुए थे. ऐसे में खुद इसकी चपेट में आ गए. जनपद के कोरोना योद्धा एसीएमओ डॉ जंगबहादुर की बीएचयू के कोविड हॉस्पिटल में मृत्यु हुई.

पहले डॉ जंगबहादुर को कोरोना पॉजिटिव आने पर इलाज के लिए गैलेक्सी हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया था. वहां उनकी एक रिपोर्ट नेगेटिव आई. लेकिन दोबारा जांच करवाई गई तो रिपोर्ट पॉजिटिव निकली. इसके बाद उन्हें बीएचयू में आईसीयू में शिफ्ट किया गया था. उनकी हालत बेहद गंभीर थी. बता दें की डॉक्टर जंग बहादुर पिछले चार महीनों से जनपद में कोविड हॉस्पिटल, कोविड मेडिकल स्टाफ और क्वारंटाइन सेंटर्स की व्यवस्था का निर्देशन कर रहे थे. जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने एडीशनल सीएमओ की मौत पर गहरा दुःख जताया है और इसे वाराणसी जिला प्रशासन के लिए अपूरणीय क्षति बताया है.

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बीती रात अचानक उनकी तबीयत खराब हो गई और बाद में उनका निधन हो गया. डॉ. जंग बहादुर पर वाराणसी में कोरोना को लेकर बड़ी जिम्मेदारी थी. वे ही अस्पतालों के प्रबंधन, मेडिकल स्टाफ और क्वारनटीन करने का काम देखते थे. अपनी ड्यूटी हुए वे कोरोना संक्रमण के शिकार हो गए. डॉ. जंग बहादुर की सुनियोजित जिम्मेदारी और संचालन के कारण ही सभी अस्पतालों का प्रबंधन सही ढंग से चल रहा था.

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गौरतलब हो की डॉ जंगबहादुर ने गोरखपुर बीआरडीएस कॉलेज से एमबीबीएस किया था. वे खुद बीएचयू से बीएससी कर चुके हैं. 1993 में मेडिकल ऑफिसर के तौर पर इनकी जॉइनिंग हुई थी. पहली जॉइनिंग देवरिया में हुई थी. तब वे मऊ रहे इसके बाद 2005 में बनारस में शिफ्ट हो गए. तबसे यहीं पर हैं. बनारस में महामना कॉलोनी में उनका अपना मकान है.

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