रेप की शिकायत पर पुलिस ने नहीं दर्ज की रिपोर्ट तो महिला अदालत का रास्ता चुना, कोर्ट का कार्रवाई का आदेश

Smart News Team, Last updated: Sun, 21st Mar 2021, 10:19 AM IST
  • महिला की रेप की रिपोर्ट पुलिस थाने में दर्ज नहीं किए जाने पर अदालत ने थाना प्रभारी पर कार्रवाई और महिला की शिकायत दर्ज करने के आदेश दिए. वही थाना प्रभारी के ऊपर 15 दिन के नादेर कार्रवाई कर रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने के लिए भी कहा है.
रेप की शिकायत पर पुलिस ने नहीं दर्ज की रिपोर्ट तो महिला अदालत का रास्ता चुना, कोर्ट का कार्रवाई का आदेश

वाराणसी. बलात्कार जैसे अपराधों का थाने में रिपोर्ट नहीं लिखना अपराध की श्रेणी में रखा गया है. उसके बावजूद भी कई पुलिस कर्मी व थाना इंचार्ज महिलाओं की शिकायत को नहीं लिखते है. जिसके चलते उन्हें जगह जगह भटकना पड़ता है. जिसे कोर्ट ने गंभीरता से लिया है. साथ एक दुराचार के मामले में रिपोर्ट नहीं लिखने पर कोर्ट ने थाना प्रभारी के ऊपर 15 दिन में कार्रवाई कर जानकरी भी देने के लिए कहा है. इसके साथ ही पीड़िता की शिकायत को भी दर्ज करने का आदेश दिया है.

दरअसल वाराणसी नगर निगम की नियमित सफाई कर्मी ने कोर्ट में आवेदन कर बताय था कि सुजीत नामक कार्यवाहक सुपरवाइजर ने उसे आएदिन छेड़ता था. वही 5 दिसंबर 2020 को काम करने के बहाने उसने बेनिया स्थित जनानी अस्पताल के नगर निगम के गोदाम में बुलाया और उसका बलात्कार किया. साथ ही यह भी धमकी दी की अगर किसी को इसके बारे में बताय तो पुरे परिवार को जान से मर देगा. जिसके बाद दूसरे दिन महिला थाने पहुंची और रिपोर्ट लिखवाने की कोशिश की, लेकिन थाना प्रभारी आशुतोष तिवारी ने शिकायत दर्ज नहीं किया.

BHU की प्रॉक्टर के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी, लूट और छेड़खानी के हैं आरोप

थाने में शिकायत दर्ज नहीं होने के बाद महिला ने एसएसपी को पत्र लिख इसकी जानकारी दी. उसके बाद भी महिला की कही भी सुनवाई नहीं हुई. जिसके बाद महिला ने थक हार कर कोर्ट का रास्ता चुना और वहां पर अपनी शिकायत की सुनवाई का आवेदन कर दिया. जिसके बाद कोर्ट ने थाना प्रभारी के ऊपर कार्रवाई करने के निर्देश देने के साथ महिला की शिकायत दर्ज कर उसपर कार्यवाही के भी आदेश दिए है.

आज ही निपटा लें सभी शुभ काम, जानें होलाष्टक में क्या हो सकता है नुकसान

आपको बता दे कि दुराचार के मामले में एफआईआर नहीं लिखने पर आईपीसी की धारा 166 ए के तहत अपराध है. जिसे चचिर्त निर्भया काण्ड के बाद विधायिका में संशोधन किया गया था. वही इस विधायिका के तहत पीड़िता की शिकायत नहीं लिखने पर आरोपित को बचने का प्रयास करना है. जो आईपीसी की धारा 217 एवं 218 में भी अपराध की श्रेणी में रखा गया है. जिसके चलते ही कोर्ट ने थाना प्रभारी के ऊपर कार्रवाई के आदेश दिए है.

मस्जिद के लाउडस्पीकर से परेशान BHU के छात्र ने पुलिस से मांगी मदद, मिला ये जवाब

आज का अखबार नहीं पढ़ पाए हैं।हिन्दुस्तान का ePaper पढ़ें |

अन्य खबरें