वाराणसी एयरपोर्ट पर कम दृश्यता होने से विमान सेवाएं बाधित, ILS नहीं है अपग्रेड

Smart News Team, Last updated: 07/12/2020 10:38 PM IST
लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम के अपग्रेड नहीं होने से विमान सेवाएं बाधित होती हैं. जिसके कारण कम दृश्यता होने पर एयरपोर्ट पर विमान चक्कर लगाते रहते हैं और उसके बाद उन्हें लखनऊ या कोलकाता एयरपोर्ट के लिए डायवर्ट कर दिया जाता है.
वाराणसी एयरपोर्ट पर इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम के अपग्रेड नहीं होने से कम दृश्यता होने पर विमान सेवाएं बाधित होती हैं.

वाराणसी. जिले के लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर अभी तक आईएलएस (इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम) अपग्रेड नहीं हुआ है. एयरपोर्ट पर फिलहाल कैट वन प्रणाली का आईएलएस का ही इस्तेमाल किया जा रहा है. जिसके कारण कोहरे के दिनों में विमान सेवाएं प्रभावित हो रही है. गौरतलब है कि कोहरे के कारण एयरपोर्ट पर कम दृश्यता होने होने की वजह से विमान पहले तो हवा में चक्कर लगाते रहते हैं और उसके बाद उन्हें लखनऊ या कोलकाता एयरपोर्ट पर डायवर्ट कर दिया जाता है.

आपको बता दें कि पिछले दिनों अहमदाबाद से वाराणसी एयरपोर्ट पर पहुंचा स्पाइसजेट एयरलाइंस का विमान कम दृश्यता होने पर आधे घंटे तक वाराणसी हवाई क्षेत्र में चक्कर लगाता रहा. उसके बाद उसे लखनऊ एयरपोर्ट पर डायवर्ट कर दिया गया. जिसकी वजह से वह फ्लाइट 2 घंटे 45 मिनट की देरी से वाराणसी एयरपोर्ट पहुंची.

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अधिकारियों का कहना है कि देश के सभी मेट्रो एयरपोर्ट पर कैट थ्री 'ए' और कैट थ्री 'बी' प्रणाली के आईएलएस लगाए जा चुके हैं जिससे 50 मीटर दृश्यता होने पर भी विमानों की आसानी से लैंडिंग और टेक ऑफ हो जाता है. लेकिन वाराणसी एयरपोर्ट का रनवे क्षेत्रफल कम होने से आई एल एस को अपग्रेड करने में समस्या आ रही हैं.

कम जगह होने के कारण आईएलएस के साथ लगने वाले उपकरणों को स्थापित नहीं किया जा सकता है. यदि भूमि अधिग्रहण का कार्य हो जाता तो रनवे की लंबाई भी बढ़ जाएगी और आईएलएस भी अपग्रेड हो जाता. एयरपोर्ट पर कैट वन प्रणाली के आइएलएस जिन एयरपोर्ट पर स्थापित हैं वहां 800 मीटर से कम दृष्यता होने पर विमानों की लैंडिंग और टेकआफ नहीं हो सकती है. वहीं, कैट सेकेंट में 300 मीटर से कम होने पर, कैट थ्री 'ए' में 180 मीटर, कैट थ्री 'बी' में दृष्यता 46 मीटर और कैट थ्री 'सी' प्रणाली में शुन्य दृष्यता पर भी विमानों की लैंडिंग टेकआफ आसानी से हो सकती है.

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इसके अलावा एयरपोर्ट निदेशक ने आकाशदीप माथुर ने बताया कि भूमि अधिग्रहण होने के बाद रनवे के विस्तार के बाद ही इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम को अपग्रेड किया जा सकता है.

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