वाराणसी में पुलिस कस्टडी से लापता बीएचयू छात्र की कोर्ट ने माँगी जानकारी

Smart News Team, Last updated: 20/08/2020 09:16 AM IST
  • वाराणसी के बीएचयू छात्र के पुलिस कस्टडी से लापता हो जाने पर उसके पिता की शिकायत को संज्ञान में लेते हुए हाईकोर्ट ने पुलिस से लापता छात्र के संबंध में जानकारी हासिल की है. वही लापता छात्र का पिता बीते छह माह से बनारस में दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है.
बीएचयू

 इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी के जिला अधिकारी, एसएसपी व लंका थाना प्रभारी को नोटिस जारी करते हुए निर्देश दिए हैं कि वह लापता बीएचयू के छात्र के संबंध में पूरी जानकारी के साथ जवाब दें. आदेश में मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर एवं न्यायमूर्ति समित गोपाल की खंडपीठ ने सौरभ तिवारी के पत्र को बंदी प्रत्यक्षीकरण जनहित याचिका के रूप में कायम करते हुए यह निर्देश दिए हैं. हाईकोर्ट ने लिखे पत्र में बताया कि बीएचयू में बीएससी द्वितीय वर्ष का छात्र शिव कुमार त्रिवेदी 12 फरवरी से लापता है. विश्वविद्यालय से सिपाही उसे पकड़ कर ले गए थे. शिवकुमार के पिता ने जब इस संबंध में पुलिस से जानकारी हासिल की तो उन्हें कोई भी जवाब नहीं मिला. इसके बाद उन्होंने चीफ प्रॉक्टर कार्यालय के माध्यम से 16 फरवरी को शिकायत दर्ज कराई लेकिन छह माह बीत जाने के बाद भी अब तक छात्र की कोई भी जानकारी नहीं मिल सकी.

शासकीय अधिवक्ता को याचिका के माध्यम से वाराणसी के अधिकारियों को नोटिस दिया गया है. बीएससी द्वितीय वर्ष का छात्र क्षेत्र के पंजाबी लाज में रहता था. 13 फरवरी को बीएचयू के एक छात्र की सूचना पर डायल 112 पुलिस थाने ले गई. इसके बाद से वह छात्र लापता हो गया जब तीन दिन तक घर वालों को उसका फोन नहीं आया तो भाई और पिता जानकारी हासिल करने के लिए विद्यालय पहुंचे. जहां से प्राप्त सूचना के बाद उसके कमरे का दरवाजा खुला हुआ पाया गया जबकि उसका मोबाइल और पैसे सभी सामान सुरक्षित था. लापता छात्र के पिता भाई ने उसकी काफी खोजबीन की और थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई. पुलिस ने खानापूर्ति की और कई जगह तलाश की. इसके अलावा सोशल मीडिया से लेकर अखबारों में विज्ञापन भी करवाया लेकिन कहीं भी कोई सुराग नहीं मिल सका.

बताते चलें कि शिवकुमार त्रिवेदी बडकरी थाना ब्रजपुर जिला पन्ना मध्य प्रदेश का रहने वाला है और उसके पिता प्रदीप त्रिवेदी किसान है. उसकी मां गायत्री देवी की करीब 20 वर्ष पूर्व सांप के काटने से मौत हो चुकी है. बेटे के उज्जवल भविष्य की कामना के लिए पिता ने उसे काशी हिंदू विश्वविद्यालय में पढ़ाई के लिए भेजा था लेकिन जब से उसका पुत्र लापता हो गया है तब से उसके ऊपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. अब वह अपने पुत्र को खोजने के लिए जगह-जगह मदद की गुहार लगाते हुए बनारस की गलियों में दर-दर भटक रहा है.

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